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Chaitra Navratri 2023: 22 मार्च से चैत्र नवरात्रि आरंभ, जानिए नौ देवियों को अलग-अलग भोग लगाने के फायदे

Mon, 13 Mar 2023 07:03 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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चैत्र नवरात्रि 2023: नवरात्रि के 9 दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-उपासना की जाती है। - फोटो : amar ujala
22 मार्च 2023 से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होने जा रहा है। चैत्र नवरात्रि के शुरू होते ही नया हिंदू विक्रम संवत 2080 भी शुरू हो जाएगा। इस दिन महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष को गुडी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि बहुत ही खास तरीके से मनाया जाता है। नवरात्रि के 9 दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-उपासना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन यानी चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ देवी आराधना शुरू हो जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत रखने के कुछ नियम होते हैं जिसका पालन करना बहुत ही जरूरी होता है। आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों और उनका प्रिय भोग। 
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प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री - फोटो : amar ujala
प्रथम दिन
कलश स्थापना के साथ ही प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है और माना  जाता है कि माता शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, इसीलिए इनको सफेद रंग बेहद प्रिय है।इस दिन मां को गाय के घी का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और देवी मां अपने भक्तों को हर संकट से मुक्ति देती हैं।
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दूसरा स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : amar ujala
दूसरा दिन
दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी का दिन है और माता ब्रह्मचारिणी के पूजन-अर्चन से आपके व्यक्तित्व में वैराग्य, सदाचार और संयम बढ़ने लगता है।इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि यह भोग लगाने से माँ दीर्घायु होने का वरदान देती हैं इसके साथ ही इस प्रसाद को घर के सभी सदस्यों को अवश्य ही दें। वास्तु शास्त्र के अनुसार माता के प्रसाद को ग्रहण करने से इंसान लंबी उम्र को प्राप्त करता है।

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तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा - फोटो : amar ujala
तीसरा दिन
तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है और कहा जाता है कि माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना से मानव सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाते हैं। वही माता के भोग की बात करें तो मां को दूध से बनी मिठाइयां, खीर आदि का भोग लगाएं, जिससे माता चंद्रघंटा अधिक प्रसन्न होती हैं।मान्यता है कि ऐसा करने से धन-वैभव व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
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चौथा स्वरूप मां कूष्मांडा - फोटो : amar ujala
चौथा दिन
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है और माता को मालपुए का भोग लगाया जाता है। आप माता को लगाए भोग को ब्राह्मणों को दान करते हैं तो आपको अधिक फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही इस भोग को घर के सभी सदस्यों को भी अवश्य ही ग्रहण करना चाहिए।ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है और मनोबल भी बढ़ता है।
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पांचवां स्वरूप मां स्कंदमाता - फोटो : amar ujala
पांचवां दिन
पांचवें दिन दुर्गा जी के पंचम स्वरूप माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है और माता को केले का भोग चढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि माता को केले का भोग लगाने से सभी शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है,बच्चों का करियर अच्छा रहता है।
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छठा स्वरूप मां कात्यायनी - फोटो : amar ujala
छठा दिन
नवरात्रि के छठें दिन देवी के षष्टम रूप माता कात्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है और माता कात्यायनी को भोग के रूप में लौकी,मीठे पान और शहद चढ़ाया जाता है। ऐसा करने से आकर्षण शक्ति में वृद्धि के योग बनते हैं और घर से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

 

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सातवां स्वरूप मां कालरात्रि - फोटो : amar ujala
सातवां दिन
नवरात्र के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाती है और माता कालरात्रि शत्रुओं का नाश करने वाली होती हैं। इस दिन देवी कालरात्रि को गुड से निर्मित भोग लगाना चाहिए।मान्यता है कि इस दिन यह भोग लगाने से माँ  रोग व शोक से मुक्ति देती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
 

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आठवां स्वरूप महागौरी - फोटो : amar ujala
आठवां दिन
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा अर्चना का विधान है।महागौरी की पूजा करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, घर में सुख-समृद्धि आने लगती है। माता महागौरी को नारियल का भोग बेहद प्रिय है, इसीलिए नवरात्रि के आठवें दिन आप भोग के रूप में नारियल चढ़ाएं तो आपको मनोवांछित फल प्राप्त होगा और घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
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नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री - फोटो : amar ujala
नवां दिन
नवरात्रि का नौवां दिन माता सिद्धिदात्री का है। देवी सिद्धिदात्री को घर में बने हलवा-पूड़ी और खीर का भोग लगा कर कन्या पूजन करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं।

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