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Pradosh Vrat 2025: शुभ योग में हिंदू नववर्ष का पहला प्रदोष व्रत, इस विधि से करें महाकाल की पूजा

Thu, 10 Apr 2025 10:43 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसे हर त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन मुख्य रूप से देवों के देव महादेव की उपासना की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत पर सच्चे भाव से महाकाल की आराधना करने से साधक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। 
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वर्तमान में चैत्र माह जारी है और इस माह में यह व्रत 10 अप्रैल को रखा जा रहा है। - फोटो : freepik
Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसे हर त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन मुख्य रूप से देवों के देव महादेव की उपासना की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत पर सच्चे भाव से महाकाल की आराधना करने से साधक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। ये तिथि सुहागिन महिलाओं के लिए और भी खास है, क्योंकि इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में मधुरता का वास होता है।

वर्तमान में चैत्र माह जारी है और इस माह में यह व्रत 10 अप्रैल को रखा जा रहा है। इस दिन गुरुवार होने के कारण यह गुरु प्रदोष व्रत होगा। खास बात यह है कि, यह हिंदू नववर्ष का प्रथम प्रदोष व्रत है, जिस पर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और वृद्धि योग का संयोग बन रहा है। इस दिन चन्द्रमा कन्या राशि में रहेगा। इस संयोग में भगवान शिव की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इतना ही नहीं शिव परिवार की कृपा से जीवन में खुशियों का वास भी संभव है। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि के बारे में जानते हैं...
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पंचांग के अनुसार इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल 2025 को रात 10 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत तिथि
पंचांग के अनुसार इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल 2025 को रात 10 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 11 अप्रैल को देर रात 1:00 बजे होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत 10 अप्रैल 2025 को गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
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शुभ मुहूर्त - फोटो : freepik
शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में महादेव की पूजा का समय शाम 6 बजकर 44 मिनट से रात 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। आप इस अवधि में शिव परिवार की उपासना कर सकते है।

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प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करें। - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करें।
  • अब प्रदोष काल में पूजा के लिए सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें।
  • सबसे पहले पूजा स्थल पर शिवलिंग स्थापित करें।
  • अब शिवलिंग पर जल आक के फूल और बेलपत्र चढ़ाएं।
  • इस दौरान आप गुड़हल के फूल और मदार के फूल भी अर्पित कर सकते हैं।
  • महाकाल को फूलों की माला भी चढाएं।
  • अब आप दीप जलाकर महादेव के मंत्रों का जप करें।
  • इस दौरान कुछ फल और मिठाई का भोग भी लगाएं।
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें।
  • अंत में आरती करें और शिव परिवार का आशीर्वाद लें।
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भगवान शिव की आरती - फोटो : freepik
भगवान शिव की आरती 
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। 
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। 
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी। 
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। 
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । 
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। 
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी। 
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । 
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा। 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥  
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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