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Chaitra Amavasya 2026: 18 या 19 मार्च कब है चैत्र अमावस्या, जानें तिथि और दान

Tue, 10 Mar 2026 05:34 PM IST
Megha Kumari धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chaitra Amavasya 2026: अमावस्या हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन दान-दक्षिणा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती हैं। इसके अलावा पवित्र नदियों में स्नान करने पर पूर्वजों की कृपा मिलती हैं और दोष दूर होते हैं।
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Chaitra Amavasya 2026 - फोटो : अमर उजाला
Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है, जिसे दान-दक्षिणा के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। मान्यता है कि, इस दिन स्नान और दान करने से व्यक्ति को अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन पितरों का पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक ग्रंथों की मानें, तो अमावस्या के दिन सफेद वस्तुओं का दान करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती हैं। इसके साथ ही पीपल के वृक्ष की पूजा, भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना से सभी तरह के दोष शांत होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि, इस वर्ष चैत्र अमावस्या कब मनाई जाएगी।
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Chaitra Amavasya 2026 - फोटो : adobe stock
चैत्र अमावस्या 2026 कब है?
इस साल 18 मार्च को सुबह 8 बजकर 26 मिनट पर अमावस्या तिथि प्रारंभ हो रही है। यह 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 19 मार्च को चैत्र माह की अमावस्या मनाई जाएगी।

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Chaitra Amavasya 2026 - फोटो : adobe stock
चैत्र अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त 
  • ब्रह्म मुहूर्त 05 बजकर 08 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
  • प्रातः संध्या मुहूर्त 05 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगा और 06 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
  • अभिजित मुहूर्त दोपहर को 12 बजकर 22 मिनट से 01 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
  • विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा और 03 बजकर 36 मिनट तक बना रहेगा।
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Chaitra Amavasya 2026 - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन चीजों का करें दान
  • चैत्र अमावस्या पर गुड़ का दान करना शुभ माना गया है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और रिश्तों में प्रेम बढ़ता है। 
  • इस दिन तिल का दान करने से नकारात्मक दोष दूर होते हैं। 
  • वस्त्र दान करने से भाग्य में वृद्धि होती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
  • धन और अनाज का दान करना भी बहुत ही लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • इस विष्णु जी की आरती करना शुभ होता है। इससे पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।


भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

 

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