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Bhai Dooj 2025: भाई दूज पर क्या है तिलक करने का समय? जानें तिथि, मुहूर्त और मंत्र

Wed, 22 Oct 2025 10:42 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Bhai Dooj 2025: हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि इस साल भाई दूज का पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है। 
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भाई दूज 2025 शुभ मुहूर्त - फोटो : Amar Ujala
Bhai Dooj 2025: भाई दूज का पर्व हिंदू धर्म में भाई-बहन के पवित्र संबंध का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यानी दीपावली के तीसरे दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक करती हैं और उन्हें भोजन कराती हैं। ऐसा करने से भाई की आयु बढ़ती है और उनके जीवन में समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन अगर भाई और बहन यमुना नदी में एक साथ स्नान करें तो उनके जीवन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल भाई दूज का पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है। 

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भाई दूज 2025 शुभ मुहूर्त - फोटो : Amar Ujala
भाई दूज 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार इस वर्ष भाई दूज की द्वितीया तिथि 22 अक्तूबर 2025 की रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्तूबर 2025 की रात 10:46 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार भाई दूज का पर्व 23 अक्तूबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन भाई को तिलक लगाने के लिए दोपहर का समय सबसे शुभ माना गया है।
तिलक का शुभ मुहूर्त: दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से 12:28 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:58 बजे से 2:43 बजे तक
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भाई दूज कथा - फोटो : Amar Ujala
भाई दूज की पौराणिक कथा
भाई दूज का संबंध यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुंचे। यमुना ने प्रसन्न होकर उनका स्वागत किया, उन्हें तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन कराया। अपनी बहन के स्नेह और आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान माँगने को कहा। इस पर यमुना ने यह वर माँगा कि जो भी बहनें इस दिन अपने भाइयों का तिलक करेंगी और उन्हें भोजन कराएंगी, उनके भाइयों को कभी अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। यमराज ने यह वरदान दे दिया। तभी से यह पर्व हर वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को “भाई दूज” के रूप में मनाया जाने लगा।

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भाई को टीका करते समय करें इस मंत्र का उच्चारण - फोटो : Adobe stock
भाई को टीका करते समय करें इस मंत्र का उच्चारण
‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।’
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भाई दूज 2025 - फोटो : Amar Ujala
भाई दूज का महत्व
भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के गहरे स्नेह का म्रतीक है। इस दिन बहनें सुबह स्नान कर, पूजा करती हैं, कथा सुनती हैं और अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी सुरक्षा का वचन लेते हैं।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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