बसंत पंचमी 2021: बसंत पंचमी का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी के सन्दर्भ में निर्णय सिन्धु ग्रन्थ के पृष्ठ संख्या 445 पर इस पर्व को श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है। कामदेव के जन्म से इस तिथि का जुड़ाव जहां प्रकृति में श्री वृद्धि को करता है वहीं हमारे जीवन को बसंत के वैभव से परिपूर्ण करता है। बसंत जीवन में उमंग अर्थात् हर्ष लाता है। इस तरह यह पर्व बसंत पंचमी, सरस्वती पंचमी या श्रीपंचमी के नाम से जनसामान्य में जाना जाता है। पुराणरामच्चय में उल्लेख है-
माघ मासे सुरश्रेणे शुक्लायां पंचमी तिथौ।
रति कामौ तु संपूज्य कर्तव्य समुहोत्सवः।।
दानानि च प्रदेयानी येन तुष्यति माधवः।।
बसंत को ऋतु राज कहा गया है। श्रीमद् भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण में कहा कि ‘ऋतु नाम कुसुमाकरः’ अर्थात् ऋतुओं में बसंत हूं मैं। बसंत उत्सव हमारे जीवन में आशावाद का प्रतीक है और मां सरस्वती का अर्चन स्तवन हमारे जीवन से निराशा, निष्क्रियता, को विर्सजित कर ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का पथिक बना देता है व सौभाग्य जो जगा देता है। जागतिक सौन्दर्य एवं यौवन के आकर्षण आनन्द का पर्व है बसंत। सम्पूर्ण परिवर्तन या जीवन की दशा और दिशा में पूर्ण सुधार का आनन्दमय महोत्सव है बसंत।