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Ekadashi date: वैशाख मास में जानिए किस दिन रखा जाएगा एकादशी का व्रत

Tue, 14 Apr 2020 07:56 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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9 अप्रैल, गुरुवार से वैसाख के महीने की शुरूआत हो गई है। 7 मई, गुरुवार तक वैसाख महीना रहेगा। यह हिंदू पचांग का दूसरा महीना होता है। हिंदू पचांग के अनुसार हर माह में दो बार एकादशी तिथि पड़ती है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। आइए, आज जानते हैं इस महीने में कब है विष्णु प्रिय एकादशी तिथि...
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एकादशी का महत्व
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि का बहुत अधिक महत्व होता है। भगवान विष्णु को यह तिथि प्रिय होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

 
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भगवान विष्णु को प्रिय है वैशाख का महीना
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख का पावन महीना भगवान विष्णु को प्रिय है।


 

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वैशाख कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि
  • शनिवार,18 अप्रैल वरुथिनी एकादशी

वरुथिनी एकादशी का महत्व
  • तिथियों में श्रेष्ठ मानी जाने वाली एकादशी के बारे में कहा गया है कि जो फल ब्राह्मणों को सोना दान देने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने तथा कन्यादान करने पर मिलता है, वह मात्र इस पावन वरूथिनी एकादशी के व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।
 
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वैशाख शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि
  • रविवार, 3 मई मोहिनी एकादशी

मोहिनी एकादशी का महत्व
  • वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत करने से बहुत ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मोहिनी एकादशी के विषय में मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद जब अमृत पीने के लिए देवता और दानवों के बीच विवाद छिड़ गया तब भगवान विष्णु सुंदर नारी का रूप धारण करके देवता और दानवों के बीच पहुंच गये। इनके रूप से मोहित होकर दानवों ने अमृत का कलश इन्हें सौंप दिया। मोहिनी रूप धारण किये हुए भगवान विष्णु ने सारा अमृत देवताओं को पिला दिया। इससे देवता अमर हो गये। जिस दिन भगवान विष्णु मोहिनी रूप में प्रकट हुए थे उस दिन एकादशी तिथि थी। भगवान विष्णु के इसी मोहिनी रूप की पूजा मोहिनी एकादशी के दिन की जाती है।



 
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vishnu - फोटो : vishnu
एकादशी व्रत के नियम
  • एकादशी व्रत रखने वाले साधक को तमाम तरह के नियम-संयम का पालन करना पड़ता है।
  • काम, क्रोध आदि पर पूर्ण नियंत्रण रखना होता है।
  • झूठ बोलने और निंदा करने से बचना होता है।
  • निद्रा का त्याग करके भगवान विष्णु का जागरण, भजन, कीर्तन एवं मंत्र जप करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु के नाम और उनके अवतारों की कथा और कीर्तन करना चाहिए।






 
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