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Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पर इस विधि से करें मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा, घर में होगी बरकत

Wed, 30 Apr 2025 06:30 AM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

इस बार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 5 बजकर 32 मिनट पर शुरू हो रही है और इसका समापन 30 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर होगा। 
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इस साल 30 अप्रैल 2025 को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। इसे‘आखातीज’या ‘वैशाख तीज’के नाम से भी जाना जाता है। - फोटो : adobe stock
Akshaya Tritiya 2025 Puja Vidhi: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाता है। इस बार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 5 बजकर 32 मिनट पर शुरू हो रही है और इसका समापन 30 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि के मुताबिक इस साल 30 अप्रैल 2025 को अक्षय तृतीया है। इसे‘आखातीज’या ‘वैशाख तीज’के नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन मुख्य रूप से मां लक्ष्मी की पूजा और सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा है। यदि इस तिथि पर दान, पूजा-पाठ व हवन, जागरण किया जाए, तो साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण प्राप्ति होती हैं। पौराणिक कथा की मानें तो, अक्षय तृतीया पर त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। इसके अलावा इसी तिथि पर परशुराम जी का जन्म भी हुआ था।

ऐसे में अक्षय तृतीया देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना व उन्हें प्रसन्न करने की सबसे उत्तम तिथि है। ऐसे में आइए इस दिन की संपूर्ण पूजा विधि को जानते हैं।
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अक्षय तृतीया पर पूजा करने के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान करें। - फोटो : adobe
अक्षय तृतीया पूजा विधि
  • अक्षय तृतीया पर पूजा करने के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान करें।
  • इसके बाद साफ पीले रंग के वस्त्र पहनें।
  • अब पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव कर लें।
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पूजा स्थान पर सभी पूजन सामग्रियों को एकत्रित करें। - फोटो : adobe stock
  • पूजा स्थान पर सभी पूजन सामग्रियों को एकत्रित करें।
  • सबसे पहले एक चौकी लगाएं और उसपर पीले या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
  • चौकी पर माता लक्ष्मी और विष्णु जी की तस्वीर स्थापित करें।
  • अब उन्हें रोली व चंदन का तिलक लगाएं और विष्णु जी को पीले फूल भी अर्पित कर दें।

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अंत में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती करें और पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे। - फोटो : adobe stock
  • इस दौरान मां लक्ष्मी को कमल का फूल चढाएं।
  • अब घी का दीपक और धूपबत्ती जला लें।
  • इसके बाद विष्णु जी को पीली मिठाई और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं।
  • अब विष्णु सहस्रनाम और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती करें और पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे।
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मां लक्ष्मी की आरती - फोटो : adobe stock
मां लक्ष्मी की आरती 

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। 
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। 
मैया सुख संपत्ति दाता। 
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता। 
मैया तुम ही शुभदाता। 
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। 
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। 
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। 
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता। 
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

ऊं  जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
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भगवान विष्णु की आरती - फोटो : adobe stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥


 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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