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युग मर्डर केस: घर पहुंचते ही फूट पड़े आंसू, पढ़िए दरिंदों के लिए क्या कहा

Tue, 07 Aug 2018 11:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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लाडले युग के अपहरण और हत्या से टूट चुके परिवार को न्यायपालिका से सोमवार को सुकून मिला। आरोपियों को दोषी करार देने पर अभिभावकों के चेहरों पर संतोष के भाव नजर आए। यह भाव आंखों से आंसू बनकर भी बाहर निकले। अब हत्यारों की सजा से परिवार के सदस्यों को कलेजे की ठंडक का इंतजार है। सोमवार को अदालत परिसर में बारिश के बीच सुबह दस बजे से फैसले का इंतजार कर रहे पिता विनोद गुप्ता ने जैसे ही युग के अपहरण और हत्या के तीनों आरोपियों को दोषी करार दिए जाने का फैसला सुना, उनके चेहरे पर अलग ही संतोष का भाव नजर आया।
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इस फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा ‘मुझे न्यायपालिका पर पूरा यकीन है, आज जो फैसला आया है इससे हमारी चार सालों से युग को न्याय दिलवाने के लिए चल रही साधना लगता है पूरी होने वाली है। मेरे चार साल के मासूम का अपहरण, उसे यातना दे-दे कर मारने वाले तीनों दोषियों को ऊंसी की सजा भी कम है।
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उन्हें फांसी पर लटका देना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि ये तीनों भी वैसे ही तड़पाए जाएं, जैसे उनका बच्चा युग तड़पा होगा। उन्होंने कहा, ‘चार सालों से लगातार बेटे के न्याय के लिए भटका हूं, अदालत में हर सुनवाई में पहुंचा हूं। अब लगता है कि युग को न्याय मिलने और इन हत्यारों को उनके किए की सजा मिलने का वक्त आ गया है।’

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अदालत से युग के तीनों हत्यारों को दोषी करार दिए जाने का फैसला आने के बाद जैसे ही विनोद घर पहुंचे, वहां मौजूद सभी भावुक हो गए। विनोद गुप्ता ने आते ही अपनी मां चंद्रलेखा और युग की मां व अपनी पत्नी पिंकी को गले से लगा लिया। आंखों में आंसू और चेहरों पर सुकून के भाव झलक रहे थे। विनोद के मुंह से निकला ‘मां हम युग को न्याय दिलवाने की आधी जंग जीत गए, अब बस फैसले का इंतजार है।’
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युग की मां पिंकी ने कहा कि जिन्होंने मेरे मासूम युग को यातनाएं देकर मारा है, उन्हें उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। वे बोलीं ‘मेरे बच्चे ने उनका क्या बिगाड़ा था। अब मुझे 13 अगस्त का इंतजार है जब अदालत से उन्हें सजा मिलेगी।’ विनोद के घर पर उनके परिजनों की भीड़ लगी हुई थी। हर कोई उन्हें यही कह रहा था, अब फैसले की घड़ी आने वाली है, बस थोड़ा इंतजार और करो।
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पुलिस के नाकाम रहने के बाद सीआईडी ने जांच कर पूरी गुत्थी को सुलझाया था। युग के 14 जून 2014 को गायब होने के बाद पुलिस की खोज नाकाम रहने के बाद युग के अपहरण और हत्या के मामले की जांच की जिम्मेदारी स्टेट सीआईडी को सौंपी थी।
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सीआईडी के तत्कालीन एसपी और सेवानिवृत्त डीआईजी विनोद धवन की देखरेख में डीएसपी धन सुख दत्ता, एसआई राजेश सुरेश कुमार और एएसआई अनिल कुमार की टीम ने जांच को अंजाम तक पहुंचाया। इस केस में 20 अगस्त 2016 को पहली गिरफ्तारी की गई। 22 अगस्त को निशानदेही पर भराड़ी के टैंक से युग का कंकाल बरामद किया गया। इसी दिन विक्रांत के अन्य दो साथियों चंद्र शर्मा और तेजेंद्र पाल को गिरफ्तार कर लिया गया।
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