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सावधान! कहीं सेब के साथ 'जहर' तो नहीं खा रहे हैं आप

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अभी तक चिकित्सक एक सेब रोज खाने की सलाह देते रहे हैं, मगर अब सेब की चमक देखकर वह भी चौंक रहे हैं। यदि आप भी सेब खाना पसंद करते हैं तो ये बातें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। रिपोर्टः सुरेश शांडिल्य, शिमला
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सावधान! कहीं सेब के साथ 'जहर' तो नहीं खा रहे हैं आप

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दरअसल अमेरिका से आ रहे सेब के साथ आप मोम भी खा रहे हैं। इसके अलावा चीन से आ रहे सेब में भी इसकी मात्रा पाई जा रही है।
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इसके अलावा सेब को चमकदार दिखाने के लिए फल विक्रेता भी केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो लीवर को डैमेज करने के साथ ही नर्वस सिस्टम के लिए भी खतरा बन रहा है।

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सेब की अन्य प्रजातियों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए केमिकल की पॉलिश की जा रही है। आयातित सेब में इसकी मात्रा ज्यादा है। इस केमिकल पॉलिश के बाद सेब अपने वास्तविक रंग से ज्यादा आकर्षक हो जाता है और ग्राहक इसकी छवि के मोह में फंस जाता है।

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आयातित सेब के फल को अगर आप चाकू से खुरचेंगे तो इससे सफेद पाउडर (वैक्स) इकट्ठा हो जाएगा।
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या फिर इस सेब को गर्म पानी में डाल दें तो इसके ऊपर से सफेद मोम के जैसा पदार्थ उतरने लगेगा। इसे साफ करने के बाद जो सेब आप देखेंगे, वह बदरंग दिखेगा।
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सेब के फलों को कोल्ड स्टोर में रखने से पहले इनकी वैक्सिंग की जा रही है। डॉक्टर मानते हैं कि सेब फल पर ज्यादा और अप्राकृतिक वैक्सिंग नुकसान पहुंचा सकती है।

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केमिकल युक्त या वैक्सिंग युक्त सेब खाने से आपका लीवर व गुर्दा तो प्रभावित होगा ही साथ ही नर्वस सिस्टम पर भी उसका असर पडे़गा। ऐसा डॉक्टरों का मानना है।

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हालांकि, हिमाचल का 90 फीसदी सेब बिना कोल्ड स्टोर के ही एप्पल सीजन में ही बेच दिया जाता है। इसमें वैक्सिंग नहीं होती है। ऐसे में हिमाचली और कश्मीरी सेब सेहत के लिए बेहतर माना जाता है। ये आयाति‌त सेब से सस्ता भी है।
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अगली बार जब भी आप सेब खरीदने जाएं तो ये चैक कर लें कि सेब की बाहरी परत कहीं मोम से तो नहीं ढकी है। अच्छी तरह चैक करने, धोने के बाद ही इसका इस्तेमाल करें। देशी सेब का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।
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