हाथ में खाली बाल्टियां और बर्तन लेकर घंटों लाइनों में अपनी बारी का इंतजार करते लोग। पानी के टैंकर की ओर बढ़ती भीड़ और पढ़ाई छोड़ पानी के जुगाड़ में लगे स्कूली बच्चों की ये तस्वीरें महा जलसंकट से उपजे हालात को बयां कर रहे हैं।
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- फोटो : amar ujala
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई पानी के जुगाड़ में लगा हुआ है। पानी के लिए लोग सड़कों पर उतर गए हैं। चक्का जाम और प्रदर्शन आम बात हो गई है। जनता गुस्से में हैं और सरकार लाचार है। कुल मिलाकर हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।
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हम बात कर रहे हैं पहाड़ाें की रानी शिमला की। इस ऐतिहासिक शहर में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। लोग कई किलोमीटर पैदल चल कर पानी ढो रहे हैं। लोगों की माने तो आज से पहले शिमला में पानी को लेकर उन्होंने ऐसे हालात कभी नहीं देखे थे।
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ये तस्वीरें समरहिल स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्रावास की है। छात्राएं और छात्र यहां पानी के लिए तरस रहे हैं। दूर-दूर से पानी ढो कर लाना पड़ रहा है।
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- फोटो : amar ujala
हालात इतने बदतर हो गए है कि लोगों के पास कोई विकल्प शेष नहीं बचा है। पानी की किल्लत से परेशान एक शहरवासी ने कुछ इस अंदाज में अपना विरोध जताया। इस व्यक्ति ने अपने कपड़ाें पर ही पानी मांग लिख डाली और खाली बाल्टियां लेकर सड़क पर उतर गया।
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नगर निगम की ओर से बुधवार को जोन दो में आने वाले 13 वार्डों में पानी की सप्लाई दी गई। सातवें दिन पानी मिलने से कई वार्डों में लोगों ने राहत की सांस ली। कई इलाके ऐसे भी रहे जहां पानी की बूंद तक नहीं आई। परेशान लोग दिन भर पार्षदों को घेरते रहे।
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नगर निगम की बैठक में पेयजल संकट और मेयर के चीन दौरे को लेकर हंगामा बरपा। कांग्रेस-माकपा पार्षदों के बवाल के आगे उप-महापौर और भाजपा पार्षद सदन छोड़ने को मजबूूर हो गए। निगम के इतिहास में पहली बार सत्ता होने के बावजूद किसी पार्टी को विपक्षी पार्षदों के सामने सदन छोड़ने को मजबूर होना पड़ा।
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कांग्रेसी पार्षदों ने विधायक अनिरूद्घ सिंह के साथ टॉलैंड में चक्का जाम कर दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जाम बढ़ने पर पुलिस के भी पसीने छूट गए। करीब आधा घंटा बाद यातायात बहाल हुआ। विधायक ने पेयजल संकट के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही निगम की नाकामी के लिए मेयर-डिप्टी मेयर को तुरंत हटाने की मांग की।
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- फोटो : amar ujala
जोन वन के कई इलाके जहां मंगलवार को सप्लाई नहीं मिली थी, वहां भरोसा देने के बाद भी बुधवार को पानी नहीं दिया गया। छोटा शिमला बाजार में पार्षद विदुशी शर्मा समेत कई घरों में पानी नहीं आया। न्यू शिमला के सेक्टर वन और तीन, कसुम्पटी की जीवणू कॉलोनी में भी पानी नहीं दिया गया।
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पंथाघाटी वार्ड के साथ लगते शकराला में 15 दिन से पानी नहीं है। इस इलाके में बुधवार को भी पानी नहीं आया। अनिल सरस्वती और वार्ड मेंबर लज्जा चंदेल ने कहा कि घरों में पीने लायक पानी नहीं बचा है।
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शहर में पानी की किल्लत के कारण पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सैलानी शिमला आने से कतराने लगे हैं। एचपीटीडीसी के सरकारी होटलों में भी पानी की किल्लत को लेकर सैलानी पूछताछ कर रहे हैं।
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water shimla
परियोजनाओं से शहर के लिए पानी की सप्लाई बढ़ाने के सरकार के दावे पूरे होते नहीं दिख रहे। सरकार ने बुधवार को 25 एमएलडी पानी देने का दावा किया था। लेकिन शहर को 18.47 एमएलडी पानी मिला है। परियोजनाओं से पंपिंग 21.57 एमएलडी की हुई है।
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उधर, निगम सरकार को पंपिंग की डिटेल बताकर सप्लाई बढ़ने का दावा कर रहा है। जबकि शिमला पहुंचते यह पानी लीकेज के चलते करीब तीन एमएलडी घट जाता है।
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पानी की मांग को लेकर अब बच्चों को भी सड़कों पर उतरना पड़ा रहा है। पढ़ाई करने की उम्र में बच्चे पानी के लिए प्रदर्शन करने को मजबूर है। पानी की कमी से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और कई दिनों से नहाए नहीं । यही वजह है कि संजौली में हुए प्रदर्शन में इस बच्चे ने भी एमसी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।
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कसुम्पटी बाजार में लोग दिन भर पानी के लिए लंबी लाइनों में लगे रहे। चिलचिलाती धूप में लोग पानी का जुगाड़ कर रहे हैं। फिर भी पानी नसीब नहीं हो रहा।
शिमला के संजौली में पानी को लेकर हुए प्रदर्शन में कांग्रेस पार्टी से पूर्व उप महापौर हरीश जनारथा, पूर्व पार्षद सुशांत कपरेट सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।