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वीरभद्र सिंह: 13 साल की उम्र में राजगद्दी संभालने वाला राजा, 15 तस्वीरों से समझिए उनके जिंदगी के सफर को

Thu, 08 Jul 2021 06:20 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर बुशहर/शिमला
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बुशहर रियासत के राजा पदमदेव सिंह के साथ वीरभद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
13 वर्ष की आयु में बुशहर रियासत की राजगद्दी संभालने वाले पहले राजा वीरभद्र सिंह थे। बुशहर रियासत के राजा पदमदेव सिंह के निधन के बाद वर्ष 1947 में वीरभद्र सिंह ने राजगद्दी संभाली थी। आजाद भारत में जहां राजशाही प्रथा समाप्त हो गई थी, बावजूद इसके राजा वीरभद्र सिंह का परंपराओं के तहत राजतिलक किया गया था। हिमाचल प्रदेश की राजनीति का अविसमरणीणय चेहरा अब हमारे बीच नहीं रहा। आजाद भारत में राजशाही प्रथा समाप्त होने के बाद भी राजगद्दी संभालने के साथ-साथ वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश की कमान छह बार बतौर मुख्यमंत्री कमान संभाली। कृष्ण वंश के 122वें राजा वीरभद्र सिंह ने प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में काफी बड़ी भूमिका अदा की। बुशहर रियासत की शान वीरभद्र सिंह का जन्म 1934 में शोणितपुर जिसे वर्तमान समय में सराहन के नाम से जाना जाता है में हुआ था। देवी देवताओं की अनुकंपा में वीरभद्र सिंह का जीवनकाल आगे बढ़ा।
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पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के साथ वीरभद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1947 में राजा पदमदेव का देहांत होने के बाद वीरभद्र सिंह को बुशहर रियासत की राजगद्दी संभाली गई थी। राज परिवार का इतिहास रहा है कि राजा के अंतिम संस्कार से पूर्व राजगद्दी संभालने वाले राजकुमार का राजतिलक विधि-विधान के साथ किया जाता है।

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ वीरभद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
शनिवार को रामपुर में वीरभद्र सिंह का अंतिम संस्कार होगा। इससे पूर्व उनके वारिस टीका विक्रमादित्य सिंह का राजतिलक किया जाएगा और उन्हें राजगद्दी पर बिठाने के बाद वीरभद्र सिंह का रामपुर में अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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1983 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर शपथ लेते वीरभद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
उनके निधन की सूचना मिलते ही समूची रामपुर रियासत में शोक की लहर दौड़ गई है। राज दरबार परिसर में उनके समर्थक सुबह से ही जुटना शुरू हो गए थे।
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वीरभद्र सिंह की माता शांति देवी। - फोटो : अमर उजाला
वीरभद्र सिंह का विवाह दो बार हुआ। 20 साल की उम्र में जुब्बल की राजकुमारी रतन कुमारी से उनकी पहली शादी हुई। लेकिन कुछ वर्षों बाद ही रतन कुमारी का देहांत हो गया। इसके बाद 1985 में उन्होंने प्रतिभा सिंह से शादी की। प्रतिभा सिंह भी मंडी से सांसद रह चुकी हैं। वीरभद्र और प्रतिभा के पुत्र विक्रमादित्य सिंह भी वर्तमान में शिमला ग्रामीण से विधायक हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल में सबसे अधिक छह बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड वीरभद्र सिंह के नाम दर्ज है। 1983 से 1985 पहली बार, फिर 1985 से 1990 तक दूसरी बार, 1993 से 1998 में तीसरी बार, 1998 में कुछ दिन चौथी बार, फिर 2003 से 2007 पांचवीं बार और 2012 से 2017 छठी बार मुख्यमंत्री बने।
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- फोटो : अमर उजाला
वीरभद्र सिंह ने पहली बार महासू लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। लोकसभा के लिए वीरभद्र सिंह 1962, 1967, 1971, 1980 और 2009 में चुने गए।

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- फोटो : अमर उजाला
वर्तमान में वीरभद्र सिंह अर्की से विधायक थे। इंदिरा गांधी की सरकार में वीरभद्र सिंह दिसंबर 1976 से 1977 तक केंद्रीय पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री रहे।

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- फोटो : अमर उजाला
दूसरी बार भी वह इंदिरा सरकार में ही वर्ष 1982 से 1983 तक केंद्रीय उद्योग राज्यमंत्री रहे।

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- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री ठाकुर राम लाल की जगह मुख्यमंत्री की कमान संभाली। उसके बाद से राज्य की राजनीति में सक्रिय हुए।

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फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व की केंद्र की यूपीए सरकार में वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से लेकर 18 जनवरी 2011 तक कैबिनेट मंत्री रहे। उनके पास पहले इस्पात मंत्रालय रहा।

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- फोटो : अमर उजाला
उसके बाद उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय दिया गया। वीरभद्र सिंह परंपरागत सीट रोहड़ू से विधानसभा चुनाव लड़ते थे।

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अपने घर रामपुर की सीट के आरक्षित होने के कारण वह कभी भी यहां से चुनाव नहीं लड़ पाए।

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- फोटो : अमर उजाला
पुनर्सीमांकन के चलते रोहड़ू सीट भी आरक्षित हुई तो 2012 में उन्होंने शिमला ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ा।
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- फोटो : अमर उजाला
2017 में उन्होंने यह सीट अपने बेटे विक्रमादित्य सिंह के लिए सीट छोड़ दी और खुद अर्की से चुनाव लड़े।
 
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