मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी मौके पर चौका मारा। पूर्व भाजपा विधायक उर्मिल ठाकुर को कांग्रेस में शामिल कर लिया। मन ही मन कह रहे हों धूमल जी राजनीतिक समीकरण अब बदलेंगे।
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धूमल जी अब बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
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पिछले दस वर्षों से देवर और भाभी में सियासी जंग जारी है। अब तक देवर नरेंद्र ठाकुर ही भाभी उर्मिल ठाकुर के खिलाफ तेवर दिखाते रहे हैं, इस बार भाभी बगावत पर उतर आई हैं।
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कारण भी बड़ा है। उपचुनाव में टिकट न मिलना। एक बड़े राजनीतिक (जगदेव) परिवार की बहू और बेटे में विरासत को संभालने की लड़ाई है।
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देवर कभी भाभी के खिलाफ निर्दल मैदान में उतरे आते हैं तो कभी विरोधी खेमे का दामन थाम लेते हैं। अब लोकसभा के साथ हो रहे उपचुनाव में टिकट न मिलने से नाराज भाभी ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।
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हमीरपुर की राजनीति में देवर भाभी में 36 का आंकड़ा बदस्तूर कायम है। पिछले दस सालों की सियासी टस्सल आज इस मोड़ पर पहुंच गई है कि उर्मिल ठाकुर को भाजपा में 20 दिन पहले शामिल हुए नरेंद्र ठाकुर के चलते टिकट न मिलने के तीन दिन बाद पार्टी छोड़नी पड़ी। ये रीत पुरानी है।
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रविवार को जब लंबलू में उर्मिल ठाकुर ने सीएम वीरभद्र की जनसभा में कांग्रेस का दामन थामा तो भावुक हो उठीं। होना ही था। जिस पार्टी से विधायक रहीं आज उससे विदाई जो ले रही थीं।
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उपचुनाव ही नहीं लोस चुनाव में भी अब ये देखना दिलचस्प होगा कि हमीरपुर से दो बार विधायक रहीं उर्मिल ठाकुर और उनके देवर नरेंद्र ठाकुर में से कौन किसको नुकसान पहुंचाता है। जगदेव की विरासत पर किसकी तूती बोलती है, ये भी इसी चुनाव में जगजाहिर हो जाएगी।
यह फाइल फोटो है। जिसमें उर्मिल ठाकुर उनके देवर नरेंद्र ठाकुर व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल साथ खड़े हैं। 2003 के विस चुनाव की बात करें तो उस समय भी टिकट को लेकर उर्मिल और नरेंद्र ठाकुर आमने-सामने आ गए थे। टिकट उर्मिल को मिला। नरेंद्र भाजपा से रूठ गए और मित्र मंडल का गठन कर लिया।