हिमाचल में मूसलाधार बारिश से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंडी में भू स्खलन होने से दो लोग जिंदा दब गए तो शिमला में पेड़ गिरने से हॉस्टल तबाह हो गया है। मंडी के लड़भड़ोल क्षेत्र में भारी भू स्खलन के चलते दो मजदूर जिंदा दब गए।
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सोमवार देर शाम यहां भारी भू स्खलन हुआ जिसमें यहां पंप हाउस के काम में लगे दो मजदूर जिंदा दब गए। इनमें से एक को तो बचा लिया गया मगर दूसरे की जान चली गई। ये झारखंड के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
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जगह-जगह भूस्खलन से प्रदेश भर में 58 छोटी-बड़ी सड़कें बंद हो गई हैं। कई इलाकों में पेयजल परियोजनाओं में गाद भरने से पानी नहीं मिल रहा। लाइनों पर पेड़ गिरने से कई जगह बिजली आपूर्ति भी ठप है।
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शिमला में भी भारी बारिश से तबाही हुई है। संजौली में वर्किंग वुमन हॉस्टल पर पेड़ गिर गया, जिससे चार कमरे ध्वस्त हो गए। कमरे में सो रहीं दो युवतियां भी घायल हो गई हैं।
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रामपुर के पास निगुलसरी में भूस्खलन से करीब दस घंटे नेशनल हाईवे पांच बंद रहा। आनी में नेशनल हाईवे 305 भी ठप है। सड़क मार्ग बंद होने से ट्रकों में लदी सेब की हजारों पेटियां सड़क पर फंस गई हैं। रोहड़ू की गौंसारी पंचायत में भूस्खलन से दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मंडी जिले के धर्मपुर क्षेत्र में भी दो घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
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प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मंगलवार और बुधवार को भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक पूरे प्रदेश में छह अगस्त तक बारिश होने का सिलसिला चलेगा। पहली और दो अगस्त को भारी बारिश होगी।
हिमाचल में मानसून सीजन के दौरान इस साल प्रदेश में सामान्य से 17 फीसदी कम बादल बरसे हैं। पहली जून से 31 जुलाई तक प्रदेश के नौ जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई। कुल्लू जिला में सबसे अधिक सामान्य से 42 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। कांगड़ा में 18 फीसदी और मंडी में 10 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। लाहौल स्पीति, चंबा और बिलासपुर जिला में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई।