1905 में हिमाचल में आए भूकंप से करीब 28 हजार लोगों की मौत हो गई थी लेकिन देवता श्रृंगाऋषि के इस नौमंजिला मंदिर का बाल भी बांका नहीं हुआ था। जानिए इसका रहस्य। इनपुट: रोशन ठाकुर, फोटो: अजय कुमार
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110 साल पहले इस मंदिर को हिला भी नहीं पाया था 'जलजला'
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1905 में हिमाचल में आए भयंकर भूकंप से करीब 28 हजार लोगों की मौत हो गई थी। सभी इमारतें भी जमींदोज हो गईं थी। इस भूकंप ने जहां कांगड़ा जिला में भारी तबाही मचाई थी तो वहीं कुल्लू जिला भी अछूता नहीं रहा था। भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दो से तीन मंजिला मकान भी ढह गए थे। लेकिन हैरान भरा है कि जिला कुल्लू के बंजार घाटी की ऐतिहासिक नौ मंजिला मंदिर चैहणी 7.8 तीव्रता वाले भूकंप को मात दे गई थी।
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करीब 200 साल पुराने इस काष्ठकुणी मंदिर के अंतिम आठवी व नौवीं मंजिलों में हल्की दरारें आ गई थी। बाद में इन दोनों मंजिलों को गांव की सुरक्षा के लिहाज से गिरा दिया गया और अब इस ऐतिहासिक मंदिर की सात मंजिलों के साथ यहां आने वाले हर शख्स में कौतूहल व उत्सुकता पैदा कर रही है।
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आपपास की इमारतें गिर गई थीं- 1905 में विनाशकारी भूकंप से कुल्लू में भी सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। देवता श्रृंगाऋषि के कारदार राज कुमार का कहना है कि भूकंप की तीव्रता अधिक होने से मंदिर के आसपास कई दो-तीन मंजिला मकान ढह कर जमींदोज हो गए थे लेकिन मंदिर का बाल भी बांका नहीं हुआ था।
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देवता श्रृंगा ऋषि का है ये मंदिर- सात मंजिला यह मंदिर अराध्य देवता श्रृंगाऋषि का है। श्रृंगाऋषि के कारदार राज कुमार कहते हैं कि मंदिर की देखभाल देवता के सभी भक्त करते हैं।
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एक ओर जहां भूकंप रोधी मंदिर के निर्माण पर जोर दिया जा है तो वहीं पांरपरिक पहाड़ी निर्माण शैली की बनी यह भव्य बुहमंजिला इमारत 1905 के भयंकर भूकंप को झेलने की एक जिंदा मिसाल है। पहाड़ी पर स्थित करीब 90 फीट ऊंचा यह मंदिर एक रिसर्च का विषय है।