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PICS: रेस्क्यू नाकाम, न हवा न पानी, 48 घंटे से तीन जिंदगियां दांव पर

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फोरलेन एक्सप्रेस हाईवे के लिए टीहरा (बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश) में बन रही टनल-4 के धंसने से फंसे तीन मजदूरों को 48 घंटे बाद भी नहीं निकाला जा सका है। रेस्क्यू टीम के अब तक के तमाम प्रयास असफल साबित हुए हैं। टनल के अंदर न तो हवा है और न बिजली-पानी, ऐसे में मजदूरों के जिंदा होने की उम्मीद टूटती जा रही है। रिपोर्ट: संजय भारद्वाज फोटो: राजीव कश्यप, टीहरा, बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश)
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PICS: रेस्क्यू नाकाम, न हवा न पानी, 48 घंटे से तीन जिंदगियां दांव पर

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सोमवार को टनल के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए तीन तरह से कोशिश की गई। पहली कोशिश है कि टनल से मलबा हटाया जाए। ये नाकाम कोशिश शनिवार देर रात से चल रही है। दूसरा, मजदूरों को बाहर निकालने के लिए लोहे की फाल से टनल यानी एक तरह की इमरजेंसी टनल बनाई जा रही है।
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इसमें 1.3 मीटर घेरे वाले लोहे के बड़ा पाइप को मलबे में डाला जा रहा है। तीसरे और सबसे अहम कोशिश मजदूरों तक पानी, खाना और बिजली पहुंचाने की शुरू हुई है। इसके लिए अलग से मलबे में एक छोटी पाइप डाली जा रही है।

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लेकिन, मलबे के ढेर में चट्टानें आने से इमरजेंसी टनल के प्रवेश में ज्यादा वक्त लग रहा है। पिछले 40 घंटे से टनल से लगातार मलबा निकाला गया। टनों के हिसाब से मलबा निकालने के बाद भी कोई परिणाम सामने नहीं आया।
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भूतल एवं परिवहन मंत्रालय भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना में आई इस आफत के बाद रेस्क्यू आपरेशन को लीड कर रहे सीमा सड़क संगठन के निदेशक आरएस राव ने बताया कि हम ये मान कर चल रहे हैं कि अंदर मजदूर जिंदा हैं। ऑपरेशन जारी है। जल्द ही सफलता मिलने की उम्मीद है। उधर, उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर, एसपी बलदेव ठाकुर समेत पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर ही डटा हुआ है।
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क्या है फालसे टनल- इस तरह की आपात स्थिति में टनल के भीतर ही एक तरह से मिनी टनल बनाई जाती है। गिरे हुए मलबे को मशीन से धक्का देकर लोहे के बड़े-बड़े पाइप डाले जाते हैं। लगभग 10 से 15 मीटर लंबी पाइप मलबे में घुसाने के बाद मजदूरों के माध्यम से पाइप के भीतर जमा मलबा निकाला जाता है। इसके बाद दूसरी पाइप को बेल्ड कर फिर मशीन से धक्का दिया जाता है। बताया जा रहा है कि दोपहर तक करीब 28 मीटर पाइप भीतर घुसाई जा चुकी थी।
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भूखे-प्यासे डटे हैं परिजन- टनल में फंसे मजदूरों के परिजनों की सब्र का बांध भी टूटने लगा है। वे अपनों के इंतजार में टनल के बाहर भूखे-प्यासे बैठे हैं। परिजनों ने रेस्क्यू आपरेशन धीमा होने की बात तो कहीं, लेकिन प्रशासन के इंतजामों पर संतोष भी जताया।

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160 मीटर के दायरे में फंसे है मजदूर- फोरलेन के लिए बन रही इस टनल की कुल लंबाई 1250 मीटर है। एक मुहाना पी-1(टीहरा) तो दूसरा पी-2 (मल्यावर) है। पी-1 से टनल की खुदाई करीब 280 मीटर तक हो चुकी है, जबकि पी-टू से 90 मीटर तक। बताया जा रहा है कि मजदूर 160 मीटर के एक हिस्से में फंसे हैं। 40 मीटर के इस हिस्से में मलबा भरा है। जिसे रात दिन हटाया जा रहा है।

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रेस्‍क्यू में जुटी टीम।

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48 घंटे बीत जाने पर अब मजदूरों के जिंदा होने की उम्मीद टूटती जा रही है।

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मौके पर प्रशासनिक अधिकारी मौजूद।
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मौके पर पुलिस अफसर मौजूद।
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