इस चट्टान को एक अंगुली से हिलाया जा सकता है। हालांकि विशाल शिला को देखकर इस पर यकीन नहीं होता, लेकिन ये सच है। कहा जाता है कि अपने अज्ञात वास के दौरान पांडव यहां पर रुके थे। यहां से जाने से पहले अपनी निशानी के तौर पर एक छोटी चट्टान पर भीम ने इस बड़ी चट्टान को कुछ इस प्रकार रखा था कि यह आज तक उसी स्थान पर विराजमान है।