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एक अंगुली से हिलती है ये विशाल चट्टान, यहां हर मन्नत होती है पूरी

Tue, 26 Feb 2019 10:10 AM IST
ashok chauhan सतीश ठाकुर, अमर उजाला, गोहर(मंडी)
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हिमाचल के कई मंदिर रहस्यों से भरे पड़े हैं। इन मंदिरों से जुड़ी देव आस्था की बातें हर किसी को हैरान कर देती हैं। हालांकि इसके वैज्ञानिक पहलू भी हैं लेकिन देव आस्था इन वैज्ञानिक पहलुओं पर हावी रहती है।
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हिमाचल के मंडी जिला के जंजैहली गांव में एक ऐसी विशालकाय चट्टान है जिसे पांडव शिला कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि पांडव शिला नामक इस भारी भरकम चट्टान को पांडवों ने अपने अज्ञात वास के दौरान निशानी के तौर पर यहां रखा था।
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इस चट्टान को एक अंगुली से हिलाया जा सकता है। हालांकि विशाल शिला को देखकर इस पर यकीन नहीं होता, लेकिन ये सच है। कहा जाता है कि अपने अज्ञात वास के दौरान पांडव यहां पर रुके थे। यहां से जाने से पहले अपनी निशानी के तौर पर एक छोटी चट्टान पर भीम ने इस बड़ी चट्टान को कुछ इस प्रकार रखा था कि यह आज तक उसी स्थान पर विराजमान है।

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अब यह पांडव शिला लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। पांडव शिला की यह विशेषता है कि इसे एक अंगुली से हिलाया जा सकता है। इसके कारण सालों से यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 
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महाभारत काल की यह चट्टान पांडव शिला जंजैहली के कुथाह के पास है। आंधी-तूफान भी इस चट्टान को आज तक इस स्थान से नहीं हटा पाया है।जिस तरह से यह विशालकाय चट्टान एक छोटी चट्टान पर टिकी हुई है उससे यह लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं।
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चट्टान को कोई भी व्यक्ति अपनी एक अंगुली से हिला तो सकता है लेकिन इसे अपने मूल स्थान से हटा या पलट नहीं सकता। पांडव शिला नामक यह चट्टान लोगों की आस्था का भी केंद्र है।
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 कहा जाता है कि अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए लोग इस पांडव शिला पर छोटे पत्थर फेंकते हैं। यदि पत्थर इस भारी भरकम चट्टान पर ही अटक जाए तो व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। यदि पत्थर चट्टान से नीचे गिर जाए तो माना जाता है कि व्यक्ति की मनोकामना पूरी नहीं हो पाती।
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पांडव शिला नामक चट्टान को देखने के लिए प्रदेश के अलावा देश-विदेश के लोग भी पहुंचते हैं। आस्था का केंद्र बन चुकी पांडव काल की इस शिला को लोग अंगुली से या फिर अपने दोनों हाथों से हिलाते भी है ताकि इसकी सच्चाई को जान सके।
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