ताजा शोध में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मिट्टी में उगी इन सब्जियों में पलने वाला एक खतरनाक कीड़ा आपको मिरगी की बीमारी दे सकता है। पीजीआई चंडीगढ़ में मिरगी पर डाक्टरेट करने वाले फोरेंसिक लैबोरेटरी धर्मशाला के सहायक निदेशक डॉ. एसके पाल ने अपने शोध में यह दावा किया है।
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शोध के दौरान पाया है कि मिट्टी में उगने वाली सब्जियों में टेमवोर्न नामक कीड़ा विकसित होता है। सब्जियों को मिट्टी से सीधा उखाड़ कर खाने या फिर अधपका खाने से यह कीड़ा सीधा शरीर में चला जाता है।
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यह कीड़ा बाद में दिमाग में चला जाता है। इसके बाद मिरगी बीमारी व्यक्ति को जकड़ लेती है। रसायनिक खाद से पनपने वाला यह कीड़ा मिट्टी में ही होता है जो सब्जियों और पत्तों में अड़े देता है। इसे लोग नंगी आंखों से नहीं देख पाते।
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डा. पॉल के अनुसार टेमवोर्न कीड़ा गाजर, मूली, शलगम, बंदगोभी, फूलगोभी और आलू में ज्यादा पाया जाता है। इस बीमारी से ग्रस्त मरीज पूरी नींद ले। पीडि़त व्यक्ति चमकता पानी और शीशा न देखे। इसके अलावा दिन भर भूखा न रहे।
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इस बीमारी में दवाई लेने से मरीज की स्मरणशक्ति क्षीण होती है। पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व प्रोफेसर एवं न्यूरो सर्जन डॉ. अशीष पाठक ने बताया कि ऑपरेशन ही इस बीमारी का एकमात्र इलाज है।
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उनका कहना है कि सब्जियों को धोने के बाद छीलकर 15 मिनट तक नमक वाले पानी में रखने से टेमवोर्न कीड़ा मरता है। इससे मिरगी होने की संभावना न के बराबर रहती है। शोध में सुअर के मीट को भी उच्च ताप पर पकाकर खाने की सलाह दी है।
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टांडा मेडिकल कॉलेज के मिरगी विशेषज्ञ डा. अमित भारद्वाज ने बताया कि टेमवोर्न कीड़ा सुअर के मांस और धरती के अंदर उगने वाली सब्जियों में पाया जाता है। सुअर ज्यादा गंदगी में रहता है और गंदगी को अपना भोजन बनाता है। ऐसे में टेमवोर्न कीड़ा शरीर में चलता जाता है। मांस के सेवन से कीड़ा मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है। पीजीआई चंडीगढ़ के अतिरिक्त प्रोफेसर डा. परमप्रीत सिंह ने बताया कि सब्जियों और सुअर के मांस को सही तरीके से उबालना जरूरी है तभी इस बीमारी से बचा जा सकता है।
डॉ. एसके पाल अपने शोध को अमेरिका में पढ़ चुके हैं। वहां पर उनके शोध की सत्यता जानने के बाद विशेषज्ञ इसे अपना रहे हैं। देश के मेडिकल कॉलेजों और बड़े संस्थानों में भी मिट्टी में उगी सब्जियों को 15 मिनट पानी में रखने के बाद पकाने की काउंसलिंग दे रहे हैं।