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हमलावरों को छोड़ने पर भड़के लोग, पुलिस पर बरसाए पत्थर, लाठीचार्ज

Sun, 12 Feb 2017 05:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिलासपुर
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- फोटो : सभी फोटो: राजीव कश्यप, अमर उजाला बिलासपुर
हिमाचल के बिलासपुर जिले के डियारा सेक्टर में युवकों पर जानलेवा हमले के बाद शुरू हुआ विवाद और गहराता जा रहा है। देर रात दो बजे तक हंगामे के बाद शनिवार को भी माहौल तनावपूर्ण रहा। आरोपी को शाम आठ बजे जमानत मिलने की खबर सुनते ही लोगों का गुस्सा भड़क उठा। मौके पर पहुंची पुलिस से भी लोगों की धक्कामुक्की हो गई। आरोपी युवक के घर के बाहर जुटी भीड़ ने पुलिस प्रशासन और कांग्रेस विधायक बंबर ठाकुर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने पहले हल्का बल प्रयोग किया। सैकड़ों की तादाद में जुटे लोग आरोपियों को कमरे से बाहर निकालने की मांग कर रहे थे। माहौल इतना खराब हो गया कि पुलिस ने लोगों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। इस पर लोग भी भड़क गए और उन्होंने पुलिस पर पथराव कर दिया। इससे कई महिलाओं और लोगों भी चोटें आईं। गुस्साई भीड़ ने मारपीट के आरोपी युवकों की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए और इसे सड़क पर पलट दिया। मौके पर खड़ी आरोपियों की गाड़ियों की तलाशी ली गई तो इसमें खुखरी और तलवारों सहित तेजधार हथियार बरामद किए गए।
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तनावपूर्ण माहौल पर नियंत्रण करने के लिए थाना प्रभारी भूपेंद्र सिंह ने पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला। उन्होंने भीड़ को भरोसा दिलाया कि शनिवार सुबह आरोपी को यहां से बाहर भेज दिया जाएगा। लोगों को यह मंजूर नहीं था। करीब तीन घंटे बाद एसडीएम डॉ. हरीश गज्जू और डीएसपी सोमदत्त पहुंचे। उन्होंने भी समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं थे। इसके बाद दोनों अधिकारी चले गए। इसके बाद थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज ने आरोपियों को बाहर निकालने की योजना बनाई।

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इसके तहत लोगों को अलग-अलग दिशा में भेजा गया। पुलिस की क्यूआरटी (क्यूक रिस्पांस टीम) की दो गाड़ियां आरोपी के घर के बाहर लगाई गईं। पुलिस ने मौका देखते ही करीब साढ़े 12 बजे आरोपियों को गाड़ियों में भरना शुरू किया। भारी मशक्कत के बाद करीब 17 लोगों को गाड़ियों में ले जाया गया। इनमें विधायक का बेटा भी शामिल था। भड़के लोगों ने पुलिस के वाहनों पर भी पथराव कर दिया। इस पर पुलिस ने लोगों पर एक बार फिर से लाठियां भांजना शुरू कर दीं। जवाब ने लोगों ने भी पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।
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शहर के डियारा में शुक्रवार देर रात तक गुंडागर्दी का नाच चलता रहा और सरकारी अमला मूकदर्शक बना रहा। हैरानी की बात तो यह है कि इतना बड़ा हंगामा होने के बावजूद किसी बड़े अफसर ने मौके पर पहुंचने की जहमत तक नहीं उठाई। करीब तीन घंटे बाद अफसर मौके पर पहुंचे तो उनकी बात और भी हैरान करने वाली थी। वे कह रहे थे कि क्या करें मजबूरी है, सरकार से बाहर नहीं जा सकते। इससे यह बात तो साफ थी कि वे अधिकारी भी केवल विधायक के बेटे को संरक्षण देने ही पहुंचे थे। अब सवाल यह उठता है कि शुक्रवार देर रात तक हुए हंगामे में प्रशासनिक अमला आखिर किसे बचाने में लगा रहा। 
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मारपीट मामले को लेकर शुक्रवार को दिन भर हुए हंगामे के बीच आखिरकार जनता को ही लाठीचार्ज भुगतना पड़ा। पुलिस ने भी अगर मामले की तह तक जाने का प्रयास किया होता तो शायद इतना बड़ा बवाल नहीं होता और लोगों को भी देर रात को सड़क पर नहीं उतरना पड़ता। यह पहली बार नहीं है कि किसी एक व्यक्ति का नाम इस तरह के मामलों से जुड़ा हो। हर बार मामलों को रफा-दफा कर दिया जाता है। शुक्रवार रात को भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। अधिकारी रसूखदार नेता के पुत्र सहित 17 लोगों को सुरक्षित निकाल कर ले गए।
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सवाल यह भी है कि अपना और अपने पुत्र का मामले से कोई सरोकार नहीं होने का दावा करने वाले उक्त नेता का पुत्र आखिर आरोपियों के कमरे में क्या कर रहा था? जो लड़कियां साथ थीं, वे क्या कर रही थीं। इनके साथ तीन माह का नवजात बच्चा भी था। कुछ और लड़के भी कमरे में थे, वे भी 18 साल से कम उम्र के थे। आरोपियों के कमरे में तेजधार हथियार भी थे। मामले में एक बात तो साफ है कि कानून भी केवल आम लोगों के लिए ही है, उन्हीं के हिस्से में सरकारी तंत्र की बेरुखी और लाठियां भी हैं, जो उन्हें शुक्रवार शाम को मिलीं।
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एसपी की अगुवाई में फ्लैग मार्च- डियारा सेक्टर में शुक्रवार देर रात करीब एक बजे तक माहौल तनावपूर्ण रहा। इसके बाद बिगड़ते माहौल को देखते हुए पुलिस बल ने एसपी बिलासपुर राहुल नाथ की अगुवाई में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला। फ्लैग मार्च देर रात डेढ़ से दो बजे तक चला। यह पहला मौका था कि देवभूमि के नाम से जाना जाने वाला डियारा सेक्टर शुक्रवार रात को पुलिस छावनी में तबदील हो गया। पुलिस और लोगों के बीच हुई वारदात ने डियारा सेक्टर की छवि को खराब कर दिया है।
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