कहानी थोड़ी फिल्म लगेगी... पर है सच। 44 साल की इंद्रा ने शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारी उठाने के साथ-साथ कुछ ऐसा कर दिखाया कि आप भी भरोसा नहीं करेंगे। ट्विस्ट यह है कि इस सफलता के बारे में इंद्रा ठाकुर ने किसी को नहीं बताया। जमा दो के बाद इंद्रा की शादी रामपुर के खखरोला गांव में महेंद्र सिंह ठाकुर से हो गई। पढ़ाई का शौक था लेकिन शादी के बाद परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी इंद्रा पर थी, पर हिम्मत नहीं हारी। समय निकालकर पढ़ाई शुरू की। रिपोर्ट: सुभाष सेन, रामपुर बुशहर (हिमाचल प्रदेश)
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44 की उम्र में कायम कर दी मिसाल, आप भी करेंगे सलाम
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पड़ोस की लड़कियां कॉलेज जाती थीं। उन्हीं से किताबें लेकर इंद्रा ने बीए की पढ़ाई शुरू की। किसी को इस बारे में बताया नहीं। इंद्रा कहती हैं कि उन्हें डर था कि कहीं घर में पढ़ाई को लेकर किसी तरह का विवाद न हो जाए। चोरी छिपे पढ़ाई कर स्नातक की डिग्री ली। हालांकि, स्नातक के बाद इंद्रा की पढ़ाई की खबर पति महेंद्र को लग गई।
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44 की उम्र में कायम कर दी मिसाल, आप भी करेंगे सलाम
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महेंद्र ने भी इंद्रा को प्रोत्साहित किया। इंद्रा ने इसके बाद हिंदी में एमए की और अब नेट क्लीयर कर लिया है। इंद्रा पीएचडी करना चाहती हैं। टीचर बनकर समाज की उन लड़कियों और महिलाओं को पढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जिन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। स्नातक की पढ़ाई शुरू की और जब परीक्षा देने का समय आया तो कोई न कोई बहाना बनाकर इंद्रा शिमला परीक्षा देने पहुंच जातीं। कभी आईजीएमसी में रिश्तेदार को देखने का बहाना बना देतीं तो कभी स्वयं की स्वास्थ्य जांच कराने की बात कह कर परीक्षा दी।
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जब भी टाइम मिलता किताब खोल देती- घर का कामकाज निपटाने के बाद जैसे ही समय बचता वह बच्चे को गोद में लेकर किताबें खोल देतीं। कभी पति पूछते कि क्या कर रही हो? तो इंद्रा कह देती थी कि यूं ही किताबें देख रही हूं। कभी भी कोई घर में आता तो किताबें छिपा देती थीं।
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पीएचडी करूंगी- इंद्रा का कहना है कि अगर इमानदारी से मेहनत की जाए तो कोई भी काम असंभव नहीं है। चाहे उम्र कितनी भी हो। उन्होंने 44 साल की उम्र में नेट क्लीयर किया है। अब पीएचडी करूंगी।