शिमला कालका हेरिटेज रेलवे ट्रैक आज पूरी दुनिया में मशहूर है। मगर इस ट्रैक में पड़ने वाली एक टनल ऐसी भी है जिसे बनाते वक्त एक अंग्रेज इंजीनियर ने अपनी जान दे दी थी। ये इंजीनियर थे कर्नल बड़ोग। इस टनल को हांटेड टनल 33 के नाम से भी जाना जाता है।
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ये है हांटेड टनल, जहां अंग्रेज इंजीनियर ने की थी आत्महत्या
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इन्हीं के नाम पर इस ट्रैक पर बनी सबसे बड़ी सुरंग का नाम बड़ोग टनल रखा गया है। कहते हैं कि 1898 में शिमला कालका रेलवे लाइन को लेकर अंग्रेजी सरकार ने योजना तैयार की थी। अंग्रेज शिमला में आकर बसना चाहते थे। इसीलिए इस ट्रैक को बनाने की तैयारी कर ली।
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पहाड़ पर ट्रैक बनाना आसान नहीं था। इसीलिए इंग्लैड से बड़े बड़े इंजीनियर बुलाए गए। उन्हें इस ट्रैक को बनाने का जिम्मा सौंपा गया। इंजीनियर कर्नल बड़ोग भी इस टीम का हिस्सा थे।
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काम तेजी से शुरू हुआ और अंग्रेजी सरकार ने पूरी मशीनरी इस ट्रैक को बनाने में लगा दी। कालका से शुरू हुआ काम तेजी से शिमला की ओर बढ़ने लगा था। कहीं पुल तो कहीं छोटी सुरंगे बनाकर अंग्रेज इंजीनियर और कामगार आगे बढ़ रहे थे।
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तभी बड़ोग के पास ऐसे पहाड़ सामने आए कि बिना टनल बनाए यहां आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसीलिए पहाड़ को काटते हुए लंबी टनल बनाने का फैसला लिया गया। कर्नल बड़ोग इस टीम की अगुवाई करने लगे। दोनों ओर से पहाड़ को काटना शुरू किया गया।
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मगर एक किलोमीटर से भी लंबी इस टनल का काम बेहद मुश्किल था। टनल दोनों तरफ से आपस में नहीं मिल पा रही थी। कई बार खुदाई की गई। इस पर खर्चा करीब 10 गुणा तक बढ़ गया। आखिरकार अंग्रेजी सरकार ने कर्नल बड़ोग को काम से रोक दिया।
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कहते हैं कि सरकार ने उन पर एक रुपए का जुर्माना लगा दिया गया। ये जुर्माना देना मुश्किल नहीं था लेकिन बात सम्मान की थी। बताया जाता है कि कर्नल ने इसी टनल के अंदर जाकर आत्महत्या कर दी थी।
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हालांकि बाद में इस टनल के काम का जिम्मा एक और इंजीनियर हेरिंगटन को सौंपा गया लेकिन वह भी नाकाम रहा। आखिरकार एक भारतीय बाबा जिन्हें सभी बाबा भलकू कहते थे, उन्होंने इसका काम पूरा करवाया। मगर इंजीनियर की मौत के बाद यहां अप्रिय घटनाएं होने लगी थी।
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कई लोगों को इंजीनियर की आत्मा दिखाई देने लगी। रात को कुछ लोग जब यहां से गुजरते तो उन्हें इंजीनियर के चिल्लाने तक की आवाज सुनाई देने लगी। स्थानीय लोग बताते हैं कि ये इंजीनियर आज भी यहां दिखाई देता है। रात के समय यहां से लोगों ने गुजरना तक बंद कर दिया। ये बंद पड़ी टनल वहीं है जिसे मरने से पहले इंजीनियर ने बनाया था। इसे बंद कर दिया गया है।
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लोगों ने बाद में यहां मंदिर और पूजा अर्चना करवाई मगर इसके बावजूद कई लोग ऐसे हैं जो यहां इंजीनियर के चिल्लाने की आवाजें सुन चुके हैं। बड़ोग टनल इस ट्रैक पर सबसे लंबी सुरंग है। इस हैरिटेज ट्रैक से ही लाखों टूरिस्ट शिमला पहुंचते हैं। बड़ोग स्टेशन के पास इस घटना से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की गई है।