26 दिसंबर को सूर्य ग्रहण आकाश मंडल में सुबह 9:30 बजे दिखाई दिया, जो 3.30 मिनट का था। शिमला में यह सूर्य ग्रहण सुबह 8:20 से शुरू हुआ और इसका मध्यांतर 9:32 बजे तक था। ग्रहण की समाप्ति 10:54 बजे हुई। पौष कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि गुरुवार मूला नक्षत्र में कंकण सूर्य ग्रहण धनु राशि पर लगा।
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- फोटो : सोशल मीडिया
जब पृथ्वी और सूर्य के मध्य चंद्रमा आ जाता है, उस दिन सूर्य ग्रहण आकाश मंडल में दिखाई देता है। जिस दिन चंद्रमा और सूर्य के मध्य पृथ्वी आ जाती है, उस दिन चंद्र ग्रहण लगता है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है जबकि चंद्रग्रहण पूर्णमासी के दिन लगता है। पूर्णमासी की अंतिम अंश में तथा प्रतिपदा के प्रथम चरण में सूर्य ग्रहण लगता है और अमावस्या के अंतिम अंश में, प्रतिपदा चरण में चंद्र ग्रहण लगता है।
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- फोटो : ANI
ग्रहण के दौरान सूर्य एक आग के छल्ले जैसा दिखता है। इसका कारण इन दिनों पृथ्वी से सूर्य अपेक्षाकृत निकट और चंद्रमा सामान्य से दूर यानी सूर्य के करीब है। ऐसे में चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढक पाता है और इसकी परिधि नजर आती रहती है।
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Solar Eclipse
- फोटो : NASA
नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेस के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडे ने बताया कि एन्युलर (कुंडलाकार) सूर्यग्रहण में चंद्रमा सूर्य की परिधि के अलावा शेष भाग को ढक लेता है। ऐसे में इसकी परिधि रिंग ऑफ फायर जैसी दिखाई देती है।
भारत में इससे पहले कुंडलाकार सूर्यग्रहण 15 जनवरी 2010 को देखा गया था। अब 21 जून 2020 को दिखाई देगा। अगले 100 साल में भारत में छह सूर्य ग्रहण पड़ेंगे। वर्ष 2020, 2031, 2034, 2064, 2085 तथा 2114 में ये दिखाई देंगे।