खुंडियां में 6 वर्षीय मासूम सिमरन की मौत के बाद माहौल जितना हिंसक था, उतना ही मार्मिक हो गया। जैसे ही परिजनों को सिमरन के बस की चपेट में आने की सूचना मिली, वे तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।
बेटी के शव को टायर के नीचे देख पिता रविंद्र कुमार और मां अंजु देवी बेसुध हो गए। मां अंजु देवी रो-रोकर बदहवास हो गईं। पिता रविंद्र कुमार और मां अंजु देवी को लोग गले लगाकर ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे।
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इस मार्मिक माहौल को देखकर लोग भड़क गए और उन्होंने बस को आग के हवाले करने की कोशिश की। सड़क भी जाम कर दी। भीड़ में ड्राइवर-कंडक्टर और प्रशासन-पुलिस के खिलाफ गुस्सा था। भीड़ में स्कूली बच्चे थे जो अपनी सहपाठी की मौत के बाद रो रहे थे। सिमरन आदर्श विद्या मंदिर लाहड़ू खुंडियां में पढ़ने जा रही थी। जिस निजी बस में सिमरन आई थी वह पहले नाहलियां में छूट गई थी। बस 10 मिनट पहले ही निकल गई थी। बस यात्रियों के अनुसार चालक जल्दी में था क्योंकि गाड़ी का टायर पंक्चर था जो उसके खुंडियां में बदलवाना था।
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नाहलियां में बस छूटने के बाद पिता ने 3 किलोमीटर तक अपनी गाड़ी में बस का पीछा किया और सिमरन को इसमें बिठाया। पिता ने एक महिला को सिमरन को ध्यान से उतारने की बात कही। खुंडियां में सिमरन बस से उतरी। इसके बाद सिमरन आगे जाने लगी और चालक ने बस चला दी। सिमरन बस के बंपर से टकराई और टायर के नीचे आ गई। घटना माता पिता को गहरे जख्मों के साथ प्रशासन की अनदेखी को भी उजागर कर गई।
हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की ओर से समय पर किसी भी अफसर के न पहुंचने पर मासूम सिमरन के परिजन भड़क गए। दो घंटे तक पुलिस की ओर से कार्रवाई न होने पर ही भीड़ भड़क गई। चार घंटे तक मासूम की लाश बीच बाजार में बस के नीचे पड़ी रही। हिंसा के डर के बाद ही बड़े अफसर घटनास्थल पर पहुंचे। स्कूली बच्चे साथी की मौत पर सहमे हुए थे।