हिमाचल के कुल्लू जिले के सबसे बड़े धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक सरेउलसर झील इन दिनों ठंड के कारण पूरी तरह से जम चुकी है। अत्यधिक ठंड की वजह से सरेउलसर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद हो चुके हैं। आनी उपमंडल में दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ऐतिहासिक सरेउलसर झील करीब एक किमी के दायरे में फैली है। इस झील को देखने के लिए गर्मियों के दिनों में प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। सर्दियों के मौसम में दस हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित यह झील अधिक ठंड होने के से जम जाती है। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए यहां के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
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PICS: हिमाचल में हाड कंपा देने वाली ठंड, जम गई झीलें
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मान्यताएं है कि झील में नागों की माता बूढ़ी नागिन वास करती है और क्षेत्र की जनता झील की पूजा गाय के घी से करती है। ऐसा करने पर श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। क्षेत्र में कार्य कर रही हिम संस्कृति संस्था के अध्यक्ष एसआर शर्मा का कहना है कि सरेउलसर झील एक ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल हैं। यहां सुविधाओं का बहुत अभाव है। झील के लिए छह किमी तक पैदल सफर करना पड़ता है। बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी अभी यह पर्यटन स्थल वंचित है। वहीं बर्फबारी के कारण किन्नौर जिले के एक दर्जन ग्रामीण रूट अभी भी बंद हैं। आनी के जलोड़ीजोत से आगे 305 एनएच यातायात के लिए बहाल नहीं हुआ है।
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ठंड के कारण कई इलाकों में जन जीवन अस्तव्यस्त हो गया है। रविवार को सूबे के कुछ क्षेत्रों में धूप खिली लेकिन राजधानी शिमला समेत कई इलाकों में बादल छाए रहे। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश में सोमवार से मौसम साफ हो जाएगा। हालांकि, 16 और 17 दिसंबर को सूबे के पर्वतीय में बारिश और बर्फबारी हो सकती है।
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रविवार को मनाली में -3.0, कल्पा में -2.2, केलांग में -4.6 डिग्री न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी शिमला में पारा 3.4 डिग्री तक पहुंच गया। कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, चंबा, ऊना, हमीरपुर, सिरमौर और सोलन में भी पिछले 24 घंटे के दौरान तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।