सर्द होता मौसम अब लोगों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। ठंड में जरा सी लापरवाही गूंगा-बहरा भी बना सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड लगने से गले (थ्रोट) की नसों में खून का दौड़ाना कम हो सकता है।
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सर्दी ले सकती है जान, बचने के लिए आजमाएं ये नुस्खे
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कई लोगों को कान की सुनने वाली नस में खून का दौड़ना कम हो जाता है। इससे अस्थायी बहरापन भी हो जाता है। ऐसे लोगों को बहुत कम सुनाई देता है या सुनाई देना ही बंद हो जाता है। ये मेडिकल इमरजेंसी होती है।
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यदि उसी समय मरीज चिकित्सा विशेषज्ञ के पास पहुंचता है तो आडियोमीटरी जांच से इसका पता चल जाता है। तुरंत स्टेरॉयड, खून पतला करने की दवाएं आदि देकर स्थिति नियंत्रित कर ली जाती है, वरना बहरापन स्थायी भी हो सकता है।
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ठंड में मार्निंग वॉक करने कमरे से सीधे सड़क पर न निकलें। खासकर हार्ट, बीपी पेशेंट निकलने से पहले पर्याप्त गर्म कपड़े, जूते-मोजे पहनने के साथ ही सिर और कान ढककर निकलें। ऐसा न करने पर उन्हें अटैक पड़ सकता है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह चार बजे से छह बजे के बीच सर्वाधिक हार्मोनल चेंज होता है। हार्ट अटैक के जितने भी केस होते हैं, उसमें से सर्वाधिक हार्टअटैक इसी समयावधि में होते हैं। इसलिए इन दो घंटों में सर्वाधिक एहतियात बरतने की जरूरत है।
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ये हैं टिप्स- सुबह उठते ही रजाई छोड़कर कमरे से बाहर न निकलें, बल्कि पर्याप्त गर्म कपड़े, जूते-मोजे, मफलर या मंकी कैप पहनकर कमरे से निकलकर थोड़ी देर बरामदे, छज्जे आदि में खड़े रहें, फिर टहलने जाएं।
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सुबह चार या पांच बजे मार्निंग वाक पर न निकलें, बल्कि छह बजे के बाद टहलने निकलें। हार्ट, बीपी, दमा, सीओपीडी के मरीज और भी देरी से निकलें।
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आईजीएमसी शिमला के डॉ रमेश ने बताया कि यदि टहलते समय दिक्कत महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हार्ट, डायबिटीज, बीपी आदि के मरीज डॉक्टर से मिलकर दवाओं की डोज संशोधित करा लें।