हिमाचल लोक सेवा के पूर्व अध्यक्ष एवं रिटायर्ड मेजर जनरल चंद्र मोहन शर्मा ने आत्महत्या से चार दिन पहले ही सुसाइड नोट लिख दिया था। 12 नवंबर को पांच पन्नों के सुसाइड नोट से यह खुलासा हुआ है।
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नोट के हर पन्ने पर 12 नवंबर की तारीख अंकित है जबकि चंद्र मोहन ने आत्महत्या 16 नवंबर को की। बीते शुक्रवार को उन्होंने जाखू स्थित अपने आवास ग्रेस कॉटेज की बेसमेंट में लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
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मेजर जनरल ने सुसाइड नोट के दूसरे पन्ने पर लिखा है कि वह जब 2003 में फौज में तैनात थे, तब पहली बार उनके कानों में कुछ आवाजें गूंजने लगीं। उन्हें लगा कि गोलियों से ये आवाजें गूंजती हैं। दूसरे पन्ने पर लिखा है कि 2007 में वह कान का इलाज करवाने डॉक्टर के पास गए।
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डॉक्टर से पता चला कि उन्हें टिनिटस (कान बजना) की बीमारी है। इस दौरान वह फौज में सेवाएं दे रहे थे। चंद्र मोहन साल 2009 से 2013 तक लोक सेवा आयोग के पद पर सेवाएं दे रहे थे। तीसरे पन्ने पर उन्होंने जिक्र किया है कि साल 2014 में उन्होंने कान की बीमारी से जंग हार ली।
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वह पिछले करीब दो साल से टिनिटस की बीमारी से परेशान थे। इस दौरान उन्होंने 2003-14 तक इस बीमारी का इलाज किया। लेकिन इलाज करने के बावजूद इस बीमारी से ठीक नहीं हो सके। आखिर में दो साल से कान की बीमारी से परेशान होकर रिटायर्ड मेजर जनरल चंद्र मोहन शर्मा ने अपने ही घर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली।
मेजर जनरल चंद्र मोहन शर्मा का अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर 12:00 बजे कनलोग स्थित मोक्ष धाम में किया गया। इस दौरान उनकी अंतिम यात्रा में परिजन, रिश्तेदार, पुलिस और सेना के जवान मौजूद रहे।