बस के अनियंत्रित होने के बाद यहां से यात्री दूसरी बसों में भुंतर की ओर गए। अनियंत्रित बस दाएं तरफ की ओर बढ़ती तो यह पार्वती नदी में समा सकती थी। जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। बस में करीब 50 लोग सवार थे। जो मणिकर्ण से लेकर छरोड़नाला तक विभिन्न स्थानों से भुंतर व कुल्लू जाने के लिए चढ़े थे।