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10500 फीट ऊंचाई पर बने इस मंदिर में पूरी होती है हर मनोकामना, ये है पौराणिक मान्यता

Tue, 18 Jun 2019 10:22 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/कुल्लू
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माता बूढ़ी नागिन झील - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। प्रदेश के लोगों में गहरी देव आस्था इसके वैज्ञानिक पहलुओं पर हावी रहती है। कुल्लू जिले के लोगों में भी देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था है। 
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माता बूढ़ी नागिन मंदिर - फोटो : अमर उजाला
 समुद्रतल से करीब 10, 500 फीट पर सरयोलसर में वास करने वाली माता बूढ़ी नागिन पर घाटी के लोगों की गहरी आस्था है। आषाढ़ संक्रांति से यहां श्रद्धालुओं का मेला लग गया है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए  पहुंच रहे हैं।
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माता बूढ़ी नागिन झील - फोटो : अमर उजाला
माता के मंदिर के कपाट सर्दी के दिनों पांच माह तक बंद रहते हैं। इसके बाद सात महीने तक श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा पाठ के साथ देसी घी का चढ़ावा चढ़ाया जता है।

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माता बूढ़ी नागिन मंदिर के लिए रास्ता - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर माता बूढ़ी नागिन को घी की धार चढ़ाते हैं। घाटी के रघुपुर, कराड़, जांजा, आनी, बंजार, करसोग, निरमंड, कुल्लू और कुमारसैन आदि के लोगों में माता बूढ़ी नागिन के प्रति गहरी आस्था है।
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माता बूढ़ी नागिन का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
हर साल गर्मी के दिनों में यहां उत्सव जैसा माहौल रहता है। करीब एक किलोमीटर की परिधि में फैली माता की पवित्र झील सरयोलसर के चारों ओर सुख-शांति ओर समृद्धि के लिए घी की फेरी दी जाती है। 
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माता बूढ़ी नागिन का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कारदार भागे राम राणा ने कहा कि माता के भक्तों ने घी की धार से झील की परिक्रमा कर माता को रखी अपनी मनोकामना को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि इस बार पहले से अधिक संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक सरयोलसर पहुंच रहे हैं। 
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