35 का था लक्ष्य, 30 में मिली कामयाबी
केंद्रीय रेल मंत्री ने जून 2018 में शिमला-कालका रेल मार्ग का निरीक्षण कर अधिकारियों को इस ट्रैक पर चलने वाली गाड़ियों का समय साढ़े पांच घंटे से घटा कर तीन घंटे करने की संभावना तलाशने को कहा था। इसके लिए गाड़ियों की स्पीड 25 से बढ़ा कर 35 किलोमीटर प्रतिघंटा करने की योजना बनाई गई। ट्रायल के दौरान भी इंजन और कोच 35 की रफ्तार से दौड़ाए गए, लेकिन यात्री सुरक्षा के मद्देनजर रफ्तार 30 किलोमीटर प्रतिघंटा बढ़ाने का ही निर्णय लिया गया है।