500 और एक हजार के नोट बंद होने से अब आम जनता को परेशानी नहीं होगी। उन्हें अब पैसों के लिए बैंक या एटीएम की लाइन में भी नहीं लगना होगा। सरकार इसके लिए नई योजना ला रही है। आइए जानते हैं-
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पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने से किसानों और ग्रामीण अंचल के लोगों की दिक्कत दूर करने को केंद्र सरकार ने उन्हें कैशलेस व्यवस्था से जोड़ने की कवायद शुरू की है। पहले चरण में हिमाचल समेत देश के एक लाख गांवों में पॉस मशीनें लगाई जाएंगी।
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बैंक ये मशीनें सरकारी या निजी दुकानों पर निशुल्क लगाएंगे। जो बैंक इन्हें कहीं भी निशुल्क लगाएंगे, उन्हें राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) पॉस मशीन लगाने की एवज में छह हजार रुपये तक आर्थिक सहयोग देगा।
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बैंक अपने स्तर पर उन गांवों या जगहों का चयन कर नाबार्ड को बताएंगे, जहां पॉस मशीन लगाने और लेनदेन ज्यादा होने की संभावना हो। नाबार्ड के डिप्टी जनरल मैनेजर बीके मिश्रा ने बताया कि आरबीआई ने गांवों को अलग-अलग कैटेगिरी में बांटा है। टीयर -5 कैटेगिरी के गांव जिनकी आबादी दस हजार से कम है, उनमें पॉस मशीनें लगाई जाएंगी।
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नाबार्ड के डीजीएम बीके मिश्रा ने बताया कि योजना में पॉस मशीन लगाने को कृषि उत्पादों या उपकरणों की बिक्री या खरीद वाले स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। कोशिश होगी कि किसान को बिना नकदी का लेनदेन किए ही कृषि संबंधी उत्पाद मिल सकें।
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यह जरूर देखा जाएगा कि उस जगह इंटरनेट कनेक्टिविटी की दिक्कत न हो। बताया कि प्रदेश में करीब बीस हजार छह सौ गांव हैं। खास बात यह है कि ज्यादातर गांव की आबादी दस हजार से कम ही है। उम्मीद है कि हिमाचल के ज्यादा से ज्यादा गांव इस योजना में जुड़ सकते हैं।
मिश्रा ने बताया कि इस योजना को पूरा करने के लिए आरबीआई और नाबार्ड की ओर से बैंकों को डेटलाइन दी गई है। इसके तहत मार्च 2017 से पहले पहले सभी बैंकों को अपने कवरिंग क्षेत्र के ऐसे गांव और जगहों को चिह्नित करना होगा, जहां पॉस मशीन लगाई जा सके। साथ ही बैंकों को दिसंबर 2017 तक हर हाल में पॉस मशीन लगानी होगी।