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पिता लाचार, बेसहारा परिवार, घर चलाने के लिए नगाड़ा बजाती है ये बेटी

Wed, 07 Sep 2016 12:02 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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पहाड़ की इस बेटी की आज हर कोई मिसाल दे रहा है। बहादुर बेटी ऐसा काम कर रही है जो आज तक कोई नहीं कर पाया। कहानी जानकर आप भी इसे सलाम करेंगे।
पहाड़ की इस बेटी की आज हर कोई मिसाल दे रहा है। बहादुर बेटी ऐसा काम कर रही है जो आज तक कोई नहीं कर पाया। कहानी जानकर आप भी इसे सलाम करेंगे। आइए जानते हैं इस बहादुर बेटी की पूरी कहानी-

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जो लोग बेटी पैदा होने पर शोक मनाते हैं, उन्हें नेहा के जज्बे से सीख लेनी चाहिए। ज्वालाजी मंदिर में नगाड़ा बजाकर नेहा पूरा परिवार पालने के साथ साथ खुद अपनी और अपने भाई बहन की पढ़ाई का जिम्मा भी उठा रही है। - फोटो : अमर उजाला
जो लोग बेटी पैदा होने पर शोक मनाते हैं, उन्हें नेहा के जज्बे से सीख लेनी चाहिए। ज्वालाजी मंदिर में नगाड़ा बजाकर नेहा पूरा परिवार पालने के साथ साथ खुद अपनी और अपने भाई बहन की पढ़ाई का जिम्मा भी उठा रही है। यही नहीं पहले पिता के इलाज का जिम्मा भी नेहा ने ही उठाया।
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नेहा ने बताया कि उनके पिता करीब तीन साल पहले एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इससे इनका चलना-फिरना बंद हो गया। घर में कमाने वाला और कोई नहीं था। ऐसे में दो वक्त की रोटी कमाने का जिम्मा बड़ी बेटी नेहा पर आ गया। - फोटो : अमर उजाला
नेहा ने बताया कि उनके पिता करीब तीन साल पहले एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इससे इनका चलना-फिरना बंद हो गया। घर में कमाने वाला और कोई नहीं था। ऐसे में दो वक्त की रोटी कमाने का जिम्मा बड़ी बेटी नेहा पर आ गया।

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तब से नेहा ने पापा का काम संभाल लिया। नेहा अपने पापा की जगह मंदिर में नगाड़ा बजाने के लिए जाने लगी। पहले रिश्तेदारों और समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया लेकिन परिवार की जरूरतों को देखते हुए नेहा ने यह काम जारी रखा।
तब से नेहा ने पिता का काम संभाल लिया। नेहा अपने पिता की जगह मंदिर में नगाड़ा बजाने के लिए जाने लगी। पहले रिश्तेदारों और समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया लेकिन परिवार की जरूरतों को देखते हुए नेहा ने यह काम जारी रखा।
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नेहा कहती हैं कि वह अपनी खुशी से बुजुर्गों की इस परंपरा को निभाने के लिए तैयार हुई हैं। उन पर परिवार का कोई दबाव नहीं है। यह मेरे लिए फख्र की बात है कि मैं मुश्किल घड़ी में परिवार के काम आ सकूं। नेहा के पिता काफी समय से मंदिर में नगाड़ा बजाते थे। मगर अब उनकी जगह एक बेटी ने ले ली। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी बेटी ने ये काम हाथ में लिया। मंदिर जाने वाला हर कोई नेहा की कहानी सुनकर उसे शाबाशी भी देता है।
नेहा कहती हैं कि वह अपनी खुशी से बुजुर्गों की इस परंपरा को निभाने के लिए तैयार हुई हैं। उन पर परिवार का कोई दबाव नहीं है। यह मेरे लिए फख्र की बात है कि मैं मुश्किल घड़ी में परिवार के काम आ सकूं। नेहा के पिता काफी समय से मंदिर में नगाड़ा बजाते थे। मगर अब उनकी जगह एक बेटी ने ले ली। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी बेटी ने ये काम हाथ में लिया। मंदिर जाने वाला हर कोई नेहा की कहानी सुनकर उसे शाबाशी भी देता है।
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नेहा न सिर्फ परिवार का पेट पाल रही है बल्कि अपने साथ साथ अपने भाई-बहनों को भी पढ़ा रही है। जो लोग बेटी पैदा होने पर शोक मनाते हैं, उन्हें नेहा के जज्बे से सीख लेनी चाहिए। समाज को समझना होगा कि बेटी बोझ नहीं बल्कि सहारा होती है। व्यापार मंडल ज्वालाजी के प्रधान अनीश सूद ने कहा कि नेहा को सम्मानित किया जाएगा। नेहा के परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी।
नेहा न सिर्फ परिवार का पेट पाल रही है बल्कि अपने साथ साथ अपने भाई-बहनों को भी पढ़ा रही है। सहायक मंदिर आयुक्त एवं एसडीएम ज्वालामुखी संजीव कुमार का मानना है कि नेहा के जज्बे पर हर किसी को नाज होना चाहिए। जो लोग बेटी पैदा होने पर शोक मनाते हैं, उन्हें नेहा के जज्बे से सीख लेनी चाहिए। समाज को समझना होगा कि बेटी बोझ नहीं बल्कि सहारा होती है।
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जो बेटे अपने पिता के परंपरागत पेशे को अपनाने से परहेज कर रहे हैं, उसी पेशे को अपनाकर नेहा अपने पिता का इलाज करवाने के साथ परिवार की आर्थिकी को संबल दे रही हैं। हिमाचल के ज्वालाजी मंदिर के मुख्य द्वार पर पिता की भांति नगाड़ा बजाकर नेहा पारिवारिक परंपरा को तो निभा ही रही हैं। साथ ही पिता की बीमारी का इलाज भी करवा रही हैं। दुनिया भर से मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी नेहा के इस हौसले को सलाम कर रहे हैं।
जो बेटे अपने पिता के परंपरागत पेशे को अपनाने से परहेज कर रहे हैं, उसी पेशे को अपनाकर नेहा अपने पिता का इलाज करवाने के साथ परिवार की आर्थिकी को संबल दे रही हैं। हिमाचल के ज्वालाजी मंदिर के मुख्य द्वार पर पिता की भांति नगाड़ा बजाकर नेहा पारिवारिक परंपरा को तो निभा ही रही हैं। साथ ही पिता की बीमारी का इलाज भी करवा रही हैं। खुद पिता कहते हैं कि उन्हें बेटी ने बचाया है।
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