चैत्र नवरात्र: बस एक क्लिक में करें मां के 9 दिव्य स्वरूपों के दर्शन
Fri, 08 Apr 2016 01:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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चैत्र नवरात्रे आरंभ हो गए हैं। प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में नवरात्रों को लेकर खास तैयारी शुरू हो गई है। मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। इस वर्ष के नवरात्रों को अति शुभकारी माना गया है। आइए हिमाचल में माता के इन प्रतिष्ठित शक्तिपीठों के बारे में आपको बताते हैं। ये कांगड़ा स्थित ज्वालाजी मां का भव्य मंदिर है। यहां हर समय मां आग की ज्वाला के रूप में दर्शन देती है। ये ज्वाला कभी नहीं बुझती। मां के मंदिर को इस बार दस क्विंटल फूलों से सजाया गया है। यहां आने से सभी मन्नतें पूरी हो जाती हैं।
चैत्र नवरात्रे आरंभ हो गए हैं। प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में नवरात्रों को लेकर खास तैयारी शुरू हो गई है। मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। इस वर्ष के नवरात्रों को अति शुभकारी माना गया है। आइए हिमाचल में माता के इन प्रतिष्ठित शक्तिपीठों के बारे में आपको बताते हैं। ये कांगड़ा स्थित ज्वालाजी मां का भव्य मंदिर है। यहां हर समय मां आग की ज्वाला के रूप में दर्शन देती है। ये ज्वाला कभी नहीं बुझती। मां के मंदिर को इस बार दस क्विंटल फूलों से सजाया गया है। यहां आने से सभी मन्नतें पूरी हो जाती हैं।
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बिलासपुर स्थित मां नैना देवी का ये मंदिर भी देश भर के 51 शक्तिपीठों में शामिल हैं। यहां मां सती के जलते शरीर से आंखें गिरी थी। इसीलिए यहां का नाम नैनादेवी है। नैनादेवी के अलावा यहां गणेश भगवान भी विद्यमान हैं।
बिलासपुर स्थित मां नैना देवी का ये मंदिर भी देश भर के 51 शक्तिपीठों में शामिल हैं। यहां मां सती के जलते शरीर से आंखें गिरी थी। इसीलिए यहां का नाम नैनादेवी है। नैनादेवी के अलावा यहां गणेश भगवान भी विद्यमान हैं।
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देवभूमि हिमाचल के कांगड़ा में स्थित मां बज्रेश्वरी का ये मंदिर दुनिया भर में विख्यात है। यहां मक्खन से मां की पिंडी तैयार कर घृत बनाया जाता है।
देवभूमि हिमाचल के कांगड़ा में स्थित मां बज्रेश्वरी का ये मंदिर दुनिया भर में विख्यात है। यहां मक्खन से मां की पिंडी तैयार कर घृत बनाया जाता है।
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कांगड़ा के देहरा स्थित मां बगलामुखी का ये वही मंदिर है जहां पिछले साल राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी पूजा अर्चना की थी। मान्यता है कि बगलामुखी देवी की पूजा से शत्रु का नाश होता है। राजनीति और मुकदमे में विजय प्राप्त होती है। सिहांसन प्राप्त होता है।
कांगड़ा के देहरा स्थित मां बगलामुखी का ये वही मंदिर है जहां पिछले साल राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी पूजा अर्चना की थी। मान्यता है कि बगलामुखी देवी की पूजा से शत्रु का नाश होता है। राजनीति और मुकदमे में विजय प्राप्त होती है। सिहांसन प्राप्त होता है।
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हिमाचल के ऊना में स्थित मां चिंतपुर्णी का मंदिर भी प्रसिद्घ 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां भी मां सती के शरीर का एक हिस्सा गिर गया था। चिंतपुर्णी को मां चिनमास्तिका देवी के नाम से भी जाना जाता है।
हिमाचल के ऊना में स्थित मां चिंतपुर्णी का मंदिर भी प्रसिद्घ 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां भी मां सती के शरीर का एक हिस्सा गिर गया था। चिंतपुर्णी को मां चिनमास्तिका देवी के नाम से भी जाना जाता है।
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मंडी स्थित मां शिकारी का ये मंदिर बड़ा ही रहस्यमयी है। पांडवों के बनाए इस मंदिर पर कोई भी छत नहीं लगवा पाया। पांडवों ने भी यहां तपस्या कर वरदान हासिल किए थे।
मंडी स्थित मां शिकारी का ये मंदिर बड़ा ही रहस्यमयी है। पांडवों के बनाए इस मंदिर पर कोई भी छत नहीं लगवा पाया। पांडवों ने भी यहां तपस्या कर वरदान हासिल किए थे।
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शिमला के साथ मां तारा का एक विशाल मंदिर है। चोटी पर स्थित यह मंदिर राजधानी का सबसे बड़ा मंदिर है। कहा जाता है कि यहां मां की मूर्त बंगाल से लाई गई थी। मंदिर परिसर का नजारा देखने वाला है। कुछ दूरी पर शिव बावड़ी भी है।
शिमला के साथ मां तारा का एक विशाल मंदिर है। चोटी पर स्थित यह मंदिर राजधानी का सबसे बड़ा मंदिर है। कहा जाता है कि यहां मां की मूर्त बंगाल से लाई गई थी। मंदिर परिसर का नजारा देखने वाला है। कुछ दूरी पर शिव बावड़ी भी है।
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सिरमौर के त्रिलोकपुर में स्थित मां बाला सुंदरी का मंदिर।
सिरमौर के त्रिलोकपुर में स्थित मां बाला सुंदरी का मंदिर।