शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं। सभी शक्तिपीठों पर श्रद्घालु उमड़ आए हैं। आप भी दर्शन कीजिए। ये कांगड़ा स्थित ज्वालाजी मां का भव्य मंदिर है। यहां हर समय मां आग की ज्वाला के रूप में दर्शन देती है। ये ज्वाला कभी नहीं बुझती। मां के मंदिर को इस बार दस क्विंटल फूलों से सजाया गया है। यहां आने से सभी मन्नतें पूरी हो जाती हैं।
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शारदीय नवरात्रः एक क्लिक में करें मां के 12 दिव्य स्वरूपों के दर्शन
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बिलासपुर स्थित मां नैना देवी का ये मंदिर भी देश भर के 51
शक्तिपीठों में शामिल हैं। यहां मां सती के जलते शरीर से आंखें गिरी थी।
इसीलिए यहां का नाम नैनादेवी है। नैनादेवी के अलावा यहां गणेश भगवान भी
विद्यमान हैं। यहां नवरात्र में चावल के साथ मदरा का भोग लगेगा।
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देवभूमि
हिमाचल के कांगड़ा में स्थित मां बज्रेश्वरी का ये मंदिर दुनिया भर में
विख्यात है। यहां मक्खन से मां की पिंडी तैयार कर घृत बनाया जाता है।
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कांगड़ा के देहरा स्थित मां बगलामुखी का ये वही मंदिर
है जहां कुछ महीने पहले राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी पूजा अर्चना की
थी। मान्यता है कि बगलामुखी देवी की पूजा से शत्रु का नाश होता है। राजनीति
और मुकदमे में विजय प्राप्त होती है। सिहांसन प्राप्त होता है।
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हिमाचल
के ऊना में स्थित मां चिंतपुर्णी का मंदिर भी प्रसिद्घ 51 शक्तिपीठों में
से एक है। यहां भी मां सती के शरीर का एक हिस्सा गिर गया था। चिंतपुर्णी को
मां चिनमास्तिका देवी के नाम से भी जाना जाता है। यहां नवरात्र में दो समय
आरती की जाएगी।
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कांगड़ा में ही मां चामुंडा देवी का भी भव्य मंदिर
है। चामुंडा देवी के बारे में मान्यता है नवरात्र में यहां आकर मन्नत
मांगने से सभी काम बन जाते हैं। पालमपुर से 10 किलोमीटर दूर स्थित मां
चामुंडा का मंदिर है। मां की ये मूर्त जमीन के नीचे थी। मां ने स्वपन में
आकर एक पंडित को इसे बाहर निकालने और मंदिर में स्थापित करने को कहा था।
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धर्मशाला
स्थित पहाड़ियों में मां शीतला देवी का एक सुंदर मंदिर है। मां शीतला भी
दुर्गा माता का ही एक स्वरूप है। नवरात्र में यहां माता के विशेष रूपों की
पूजा होती है।
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मंडी
स्थित मां शिकारी का ये मंदिर बड़ा ही रहस्यमयी है। पांडवों के बनाए इस
मंदिर पर कोई भी छत नहीं लगवा पाया। पांडवों ने भी यहां तपस्या कर वरदान
हासिल किए थे।
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शिमला के साथ मां तारा का एक विशाल मंदिर है। चोटी पर
स्थित यह मंदिर राजधानी का सबसे बड़ा मंदिर है। कहा जाता है कि यहां मां की
मूर्त बंगाल से लाई गई थी। मंदिर परिसर का नजारा देखने वाला है। कुछ दूरी
पर शिव बावड़ी भी है।
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मनाली में हरे भड़े वनों में हिडिंबा देवी का सुंदर मंदिर है। ये मंदिर पांडवों के समय से बना है।
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सिरमौर के त्रिलोकपुर में स्थित मां बाला सुंदरी का मंदिर।