हिमाचल के बंदरों के कोहराम से अब नागालैंड भी डर गया है। ये शरारती बंदर जिस इलाके में भी जाते हैं वहां के बंदरों को भी अपनी तरह उत्पाती बना रहे हैं। इनके खौफ के कारण अब नागालैंड सरकार को भी माफी मांगनी पड़ी है।
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हिमाचल में ये बंदर कई लोगों पर जानलेवा हमला भी कर चुके हैं। दरअसल अब हिमाचल बंदरों की संख्या को कम करने के लिए इन्हें नागालैंड में बसाने की योजना बना रहा था। मगर इससे पहले ही इनके खौफ की खबर वहां पहुंच गई।
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ये बंदर कितने खौफनाक हो सकते हैं, ये जानने के बाद नागालैंड सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए। वहीं, उत्पाती बंदरों से निजात दिलाने में हिमाचल वन विभाग के अफसरों की रणनीति फिर फेल हो गई। नागालैंड ने हिमाचल के शरारती बंदरों को लेने से इंकार कर दिया है। उनका तर्क है कि हिमाचल से लाए गए बंदर नागालैंड की स्थानीय प्रजातियों को डिस्टर्ब कर सकते हैं।
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इसलिए उन्हें यहां न भेजा जाए। सूबे के लोगों के लिए परेशानी का सबब बने बंदरों को नगालैंड भेजने की राज्य सरकार की योजना को बड़ा झटका लगा है। नगालैंड सरकार ने हिमाचल सरकार को पत्र भेजकर इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
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नगालैंड के दीमापुर के मुख्य वन्यप्राणी वार्डन सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यप्राणी) को पत्र भेजकर बताया कि हिमाचल के इस प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा हुई है। हिमाचल से नगालैंड लाए जाने वाले बंदरों के लिए कोई उचित ठिकाना नहीं है। ये जहां भी जाते हैं वहीं उत्पाद का माहौल बना देते हैं।
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उन्होंने कहा कि अगर हिमाचल से लाए गए बंदरों को नगालैंड के जंगलों में भेजा जाता है तो स्थानीय प्रजातियों की आदतों और व्यवहार में भी बदलाव आ सकता है। इसे इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसके लिए नागालैंड सरकार की ओर से क्षमा भी मांगी गई है।
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इधर हिमाचल के प्रधान मुख्य अरण्यपाल एसएस नेगी ने बताया कि हिमाचल सरकार का यह प्रस्ताव नगालैंड सरकार ने मंजूर नहीं किया है।बता दें कि पूर्वोत्तर के तीन राज्यों नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम ने हिमाचल के बंदरों को अपने यहां बसाने की प्राथमिक सहमति जताई थी। हिमाचल सरकार के वन विभाग ने सितंबर महीने में इस बारे में एक प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा था।
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केंद्र सरकार ने हिमाचल सरकार के अनुरोध पर प्रदेश की 53 तहसीलों में बंदरों को वर्मिन यानी खेती और इंसानों के लिए खतरनाक घोषित कर उन्हें मारने की इजाजत दी थी, मगर कोई भी एजेंसी और लोग बंदरों को मारने के लिए आगे नहीं आ रहे थे।