वैज्ञानिकों ने हाल ही में मनाली, चंबा, मंडी और कांगड़ा में बादल फटने का कारण आरोग्रेफिक रिसीपिटेशन को बताया। इसमें एमबीटी और एमसीटी में हो रहे बदलाव के कारण बादलों का ऊपर न उठ पाना जिम्मेदार है। वैज्ञानिकों ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में चेतावनी सेंसर लगाने की अहमियत पर बल दिया। शुरू में चेतावनी देने और कम कीमत के सेंसर विकसित करने और भूस्खलन के कारण, पानी की उचित निकासी, इसके परिणाम एवं अनुकूलन पर ध्यान देते हुए बहुविषयी प्रयास करने पर जोर दिया गया।