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तस्वीरें: पैतृक गांव पहुंचे चार हिमाचली युवकों के अवशेष, ताबूत देखते ही बिलख पड़े परिजन

Wed, 04 Apr 2018 03:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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पांच साल पहले रोजी-रोटी कमाने हिमाचल से इराक के मोसुल शहर गए चार युवकों के पार्थिव अवशेष मृतकों के पैतृक गांव पहुंचे। गांव में शव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर कर बूरा हाल है। गमगीन माहौल के बीच ताबूत में पहुंचे अपनों के पार्थिव अवशेष देख परिजन बिलख पड़े।
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hemraj
इराक के मोसुल से मंगलवार सुबह घर पहुंचे चार युवकों के ताबूत में बंद अवशेषों से परिवार के सदस्य लिपटकर फूट-फूटकर रोए। जैसे ही अवशेष घर पहुंचे परिवार के लोग अचेत होकर गिर गए। पांच साल के इंतजार के बाद चारों युवकों को करीब आधे घंटे तक घर का आंगन नसीब हुआ।
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इराक के मोसुल में आतंकियों की ओर से मारे गए देहरा विधानसभा क्षेत्र की भटहेड़ पंचायत के कदरेटी गांव के इंद्रजीत के पार्थिव अवशेष पहुंचते ही परिजन ताबूत की ओर दौड़े। बेसुध परिजनों को ग्रामीणों ने  किसी ढांढस बंधाने की कोशिश की। लेकिन अपनों के पार्थिव अवशेष देख परिजनों के आंसू नहीं थम रहे थे। 

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चार साल में बेटे के गम में पिता तो दिल की बीमारी और माता को पैरालाइज अटैक आ गया।  इंद्रजीत की मांग बेटे की मौत के गम में बेसुध हो गई। इंद्रजीत का गांव के पास शमशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। 
 
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इधर, मंडी के सुंदरनगर के बायला निवासी हेमराज (32) के पार्थिव अवशेष गांव पहुंचते ही हर ओर चीख पुकार का माहौल हो गया। हेमराज की पत्नी, बच्चे सहित अन्य परिजन फूट-फूट कर रोने लगे। 
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हेमराज का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया और बेटे ने मुखाग्नि दी। इस दौरान प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। हेमराज 31 जुलाई, 2013 को दो साल के बेटे, गर्भवती पत्नी और बूढ़े मां-बाप को छोड़कर इराक गया था।
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धर्मशाला के पास्सू के अमन कुमार (31) के पार्थिव अवशेष टांडा मेडिकल कालेज से पैतृक गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही परिजन बिलख पड़े। अमन की मां बीना देवी और दादी तारा देवी के रो-रो कर आंसू सूख गए है। गांव पास्सू में मातम का माहौल है। 
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वहीं, संदीप सिंह राणा के पार्थिव अवशेष पैतृक गांव समकड़ पहुंच गए है। धमेटा में संदीप को परिजनों ने अंतिम विदाई दी। संदीप की पत्नी, माता-पिता, बच्चें और पूरा परिवार गहरे सदमे में है। गांव में माहौल गमगीन है। 
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