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तस्वीरें: दमदार अभिनय से सबका दिल जीतने वाले अनुपम खेर का शिमला से है गहरा नाता

Thu, 07 Mar 2019 01:51 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सात मार्च 1955 को शिमला में जन्मे अनुपम खेर अपनी एक्टिंग से सभी को अपना दिवाना बना लेते हैं। शिमला में पले-बढ़े अनुपम का इस शहर से गहरा नाता रहा है। 
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हिमाचल के छोटे से शहर से बॉलीवुड तक का उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है। अनुपम खेर के पिता वन विभाग में क्लर्क के पद पर थे। अनुपम ने शिमला के फागली स्कूल से मिडल तक की शिक्षा के बाद लक्कड़ बाजार स्कूल से दसवीं तक शिक्षा हासिल की। इसके बाद संजौली महाविद्यालय में आगे की शिक्षा ग्रहण की। 
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अनुपम खेर को उनके दोस्त बिट्टू कहकर बुलाते थे। कॉलेज के दौरान ही अनुपम का रंगमंच की तरफ रुझान बढ़ा। दोस्तों के साथ कभी युवा महोत्सव तो कभी कॉलेज के कार्यक्रमों में नाटक मंचन किया। एक बार तो घर से पैसे चोरी करके ऑडिशन देने के लिए गए थे और जिसके लिए उन्हें बहुत डांट भी पड़ी थी। 

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दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी (एनएसडी) से ग्रेजुएशन करने के बाद अनुपम ने थियेटर से करियर की शुरुआत की। साल 1982 में आई फिल्म 'आगमन' से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई। लेकिन साल 1984 में आई फिल्म 'सारांश' में उनके काम को सराहना मिली। इस फिल्म में अनुपम ने एक 60 साल के बूढ़े व्यक्ति का किरदार निभाया था
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उस वक्त अनुपम खेर खुद महज 30 साल के थे। 60 साल का व्यक्ति किस तरह से सोचता है, कैसे उठता-बैठता है और उसके बोलने का तरीका क्या है, अनुपम ने इसे बखूबी निभाया। इस फिल्म के बाद अनुपम अलग-अलग तरह के रोल में दिखते रहे। अनुपम खेर इंडस्ट्री के ऐसे अभिनेता हैं जो अपने किरदार को खुद में अंदर तक उतार लेते हैं। 
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रोल चाहे जैसा भी हो अनुपम ने हमेशा ही अपनी एक्टिंग से दर्शकों को खुश किया है। अनुपम ने 500 से भी ज्यादा फिल्में और 100 से भी ज्यादा टीवी सीरियल में काम किया। लेकिन अनुपम के अभिनय की खासियत ये है कि वो हर फिल्म में एक अलग किरदार के साथ नजर आते हैं।
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अनुपम, अमीर बेटे के बाप का किरदार भी उतनी ही शिद्दत से निभाते हैं जितना एक गरीब और लाचार बेटी के पिता का। चाहे कॉमेडी हो या सीरियस रोल, अनुपम सभी में बखूबी फिट बैठते हैं।
 

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कुछ वक्त पहले रिलीज हुई फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में अनुपम खेर बिलकुल अलग अंदाज में नजर आए। इस फिल्म में अनुपम खेर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के किरदार में नजर आए। फिल्म में अनुपम खेर हू-ब-हू मनमोहन सिंह जैसे दिख रहे थे। फिल्म में उनके काम को दर्शकों ने खूब सराहा।

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'कर्मा', 'तेजाब', 'राम लखन', 'दिल', 'सौदागर', '1942 ए लव स्टोरी', 'रूप की रानी चोरों का राजा' और 'हम आपके हैं कौन' जैसी कई फिल्मों में अनुपम खेर की भूमिका काफी सराहनीय रही। 'कुछ कुछ होता है', 'मोहब्बतें', 'वीर जारा', 'रंग दे बसंती', 'खोसला का घोसला','ए वेडनस डे', और 'स्पेशल 26' जैसी फिल्में अगर सफल हुईं तो उसमें अनुपम खेर की बड़ी भूमिका रही।

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सिर्फ भारत ही नहीं अनुपम खेर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके पद्मश्री अनुपम खेर को आठ बार अलग-अलग श्रेणियों में फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुका है। जिसमें 1984 में आई उनकी फिल्म 'सारांश' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। वहीं उन्हें दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

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अनुपम खेर का शिमला से गहरा लगाव रहा है। अनुपम ने मार्च 2017 में शिमला के टुटू स्थित जतोग में अपना घर खरीदा है। बीते साल 18 मई 2018 को  उन्होंने शिमला के गेयटी थियेटर में ‘मेरा वो मतलब नही था’ नाटक का मंचन किया।

 
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अनुपम खेर ने पिता की याद में इस नाटक में अभिनय किया। इससे पहले कॉलेज के दिनों में भी वे यहां नाटक किया करते थे। शिमला आने पर अनुपम खेर कॉफी हाउस, पुराने बस अड्डे जरूर जाते हैं और दोस्तों से मिलते हैं। 
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