शहीदों के परिवारों के लिए सरकार घोषणाएं तो कर देती है लेकिन बाद में इनकी कोई सुध तक नहीं लेता। कुछ ऐसा ही हुआ है शहीद संजय के परिवार के साथ।
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13 साल से शहीद के परिवार की हो रही अनदेखी
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5 अप्रैल 2002 को जम्मू कश्मीर के बोगव गांव में आतंकवादियों से लोहा लेतु हुए वीरगति को प्राप्त हुए नगरोटा बगवां के ठारू गांव के शहीद संजय कुमार को आज उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शहीद के पिता अमरनाथ।
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13 साल से शहीद के परिवार की हो रही अनदेखी
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शहीद के छोटे भाई को सरकारी नौकरी देने का वायदा किया गया था। वहीं ठारू बढ़ाई संपर्क मार्ग का नाम शहीद संजय के नाम पर रखने की बात कही थी। लेकिन अब तक इन में से एक भी वायदा पूरा नहीं किया गया। शहीद के पिता अमरनाथ का कहना है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले उनके बेटे पर उन्हें गर्व है लेकिन उसकी चिता पर किए गए वायदों का आज दिन तक पूरा न होने का उन्हें मलाल है।
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समारोह में श्रद्धांजलि देने पहुंचे मंडल भाजपा अध्यक्ष डा. नरेश विरमानी, भाजपा नेता मंगल चौधरी और अरुण मेहरा का कहना था कि शहीद संजय कुमार की शहादत से लोगों और परिवारजनों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। शहीद की माता।