श्रीनगर के नजदीक पंपोरा में आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवान हिमाचल निवासी लांस नायक ओमप्रकाश का पार्थिव शरीर उनके चायल के नजदीक चिखर गांव में लाया गया। यहां सेना ने पूरे सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया।
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वतन के लिए शहीद हुआ पहाड़ का एक और जांबाज, तस्वीरें
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शहीद को मुखाग्नि उसके छोटे भाई संजय प्रकाश ने दी। घर पर शहीद के
माता पिता के अलावा दादी व उसकी पत्नी और दो बेटियों हैं। शहीद की एक झलक
पाने के लिए सुबह से ही मौके पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
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सेना
के हेलीकाप्टर से सोमवार दोपहर 2.31 पर चायल के आर्मी ग्राउंड में उतारा
गया। शहीद की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ सुबह नौ बजे से ही जुटनी
शुरू हो गई थी।
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मैदान में शहीद का शव सम्मानपूर्वक रखा गया उसके बाद सेना के जवानों ने मौके पर शहीद को पूरे सम्मान के साथ सलामी दी और इस मौके पर सेना के उच्च अफसरों ने पार्थिव शरीर को श्रद्वांजलि अर्पित की।
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इस
दौरान माहौल काफी गमगीन हो गया और मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने आतंकवाद
मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। जब तक सूरज चांद रहेगा ओमप्रकाश तेरा नाम
रहेगा, भारत मां की जय जैसे नारों के साथ इलाका गूंज उठा।
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इसके बाद
दोपहर 2 बजकर 50 मिनट पर पार्थिव शरीर को सेना की गाड़ी में डालकर चिखर
गांव ले जाया गया। चायल से लेकर चिखर गांव तक आने वाले चायल, जनैरघाट और
कोटी बाजार बंद थे और जहां से भी सेना की गाड़ी गुजर रही थी उस पर पुष्प
बिछा रहे थे।
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चिखर गांव में शहीद ओमप्रकाश का शव शाम 4 बजकर 25 मिनट
पर पहुंचा वहां हजारों की भीड़ शहीद का एक झलक पाने के लिए बेताब थी। सेना
के जवानों ने शव को सम्मान के साथ गाड़ी से निकाला और अपने कंधों पर उठाकर
ओम प्रकाश के घर पर ले गए जहां उन्होंने शव को आंगन में रख दिया।
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इससे पहले गांव के लोग पलकें बिछाए अपने जांबाज बेटे का इंतजार कर रहे थे। बेटे को तिरंगे से लिपटे देख सबकी आंखों में आंसू आ गए।
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शहीद ओमप्रकाश की 90 वर्षीय दादी के मुंह से पोते की शहादत पर शब्द नहीं फूट रहे थे। नम आंखों से दादी ने जांबाज पोते को आखिरी विदाई दी।
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शहीद की बेटी जो पापा के वापस लौटने का इंतजार कर रही थी अचानक उन्हें ऐसी हालत में देख क्षुब्द रह गई। परिजनों ने बच्ची को संभाला।
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शव
को देखते ही ओमप्रकाश के परिजन बिलख बिलख कर रोने लगे। इसके बाद सेना के
जवानों ने शाम 4 बजकर 35 मिनट पर पार्थिव शरीर को अपने कंधे पर उठाकर अंतिम
संस्कार के लिए शमशानघाट पर ले गए और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
किया।