शव को देखते ही शहीद अनिल की पत्नी, बहन और मां शव से लिपट कर बिलख-बिलख कर रो पड़ीं। हर व्यक्ति पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा उगल रहा था। शहीद के गांव के लोग भी अनिल का चेहरे देखने के लिए बेताब दिखे। सेना के जवानों से चेहरा दिखाने के लिए बार-बार आग्रह करते रहे। ऐसे माहौल में शहीद का चार माह का बेटा कमरे में बेखर सो गया।