शिमला कालका वर्ल्ड हैरिटेज ट्रैक लोगों के लिए मौत का सफर बनता जा रहा है। शार्टकट के चक्कर में यहां आए दिन लोगों की जान चली जाती है।
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तस्वीरें: 'मौत' के ट्रैक पर जिंदगी का सफर
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पिछले तीन वर्षों में शिमला कालका रेलवे ट्रैक पर पैदल लोगों के ट्रेन की चपेट में आने से 23 मौतें हो चुकी है। बावजूद इसके यहां के लोग इसी ट्रैक पर चलने को मजबूर है।
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लोग जानते हैं कि रेलवे ट्रैक पर कभी भी जान आफत में पड़ सकती है। मगर कोई अन्य विकल्प न होने और शार्ट कट के चक्कर में वह हर रोज अपनी और मासूम बच्चों की जान जोखिम में डालते हैं।
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रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन का इस्तेमाल करना कानून अपराध है, बावजूद इसके लोग लाइन पर आवाजाही कर रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए ट्रैक के आसपास चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं लेकिन लोग इन्हें नजरअंदाज करते हैं।
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आसपास की ग्रामीण महिलाओं को न चाहकर भी इसी रेलवे ट्रैक से चलना पड़ता है। वह लाचार है क्योंकि और कोई रास्ता है ही नहीं।