मंडी के शहीद मनोज- पधर (मंडी)। दिन शुक्रवार, स्थान: मसेरन गांव, समय एक बजे। घर के बरामदे में बैठे शहीद मनोज कुमार की मां कृष्णा देवी, पत्नी पुष्पा देवी को ढांढस बांधते गांव की महिलाएं। मणिपुर में सेना के काफिले पर हुए सबसे बड़े उग्रवादी हमले में मनोज कुमार की शहादत से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे हर किसी आंखें छलक रही हैं।
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शहीदों के साथ ही चले गए अरमान, दर्द से सिसक उठा पहाड़
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शहीद के परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण पार्थिव शरीर के पैतृक गांव में पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। शहीद की पत्नी पुष्पा देवी, माता कृष्णा देवी, भाई राजेंद्र कुमार, संजीव कुमार सहित सभी रिश्तेदार बिलख-बिलख कर रो रहे थे। इसी दौरान सोलन से शहीद की बहन मायके पहुंची। मां कृष्णा देवी बिलखते हुए रो पड़ी। मनू! मेरा मोगली, हनुमान की पूजा करता था, वह जिंदा है, जल्दी घर लौटेगा। मनोज की मौत पर बिलखती बहन।
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उसका अखबार में शहीद होने का नाम नहीं है, वह जिंदा है ऐसा सभी को दिलासा दे रही थी। मनोज कुमार बीस दिन पहले ही छुट्टी काटकर ड्यूटी लौटा था और दो दिन पहले घर फोन किया था। अंतिम समय पत्नी के साथ हुई बात में मनोज ने कहा था कि उनकी बटालियन कुछ दिनों में मणिपुर से शिफ्ट होकर चंडी मंदिर चंडीगढ़ आ रही है। मनोज के घर पर शोक प्रकट करने पहुंचे गांव के लोग।
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बेटा बेखबर, बोला- पापा घर आएंगे, बड़ी बंदूक लाएंगे- मनोज का बेटा अरनव तीसरी कक्षा और बेटी अमानत प्रथम कक्षा में पढ़ती है। पिता मनोज की शहादत से बेखबर अरनव ने हाथ में पिस्टल खिलौना ले रखा था। वह बोलने लगा कि मेरा पापा घर आ रहे हैं, जो मुझे बड़ी बंदूक लाएंगे। डयूटी के दौरान मनोज का फाइल फोटो। इनपुट: कुलदीप शर्मा, मंडी
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पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल- देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। के शहीद लांस नायक रजनीश के गांव मूंही में मातम का महौल है। गांववालों को वीरवार दोपहर बाद ही हमले का पता चल गया था कि इसमें उनका रजनीश शहीद हो गया था। लेकिन किसी ने भी शहीद की पत्नी को इस बारे नहीं बताया। शहीद की पत्नी सुमिता को शुक्रवार सुबह सारी जानकारी दी गई। जिसके बाद ही उसका रो-रोकर बुरा हाल है।
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मूहीं की प्रधान स्नेह लता ने बताया कि रजनीश के शहीद होने की खबर से पूरा गांव गमगीन है। उन्होंने बताया कि अभी तक शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचने की कोई सूचना नहीं मिली है। रजनीश के बेटे सृजल और शिवांश ताया रविंद्र के साथ।
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यूनिट चंडीगढ़ शिफ्ट हो रही, फिर छुट्टी लेकर आऊंगा- पधर (मंडी)। ग्राम पंचायत सियून के चाउट गांव मणिपुर में उग्रवादी हमले में 6 डोगरा रेजीमेंट में तैनात सैनिक प्रकाश चंद की शहादत से शोक में डूबा हुआ है। शहीद के घर परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए गांव के लोगों का तांता लगा हुआ है।
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प्रकाश चंद के शहीद होने की खबर बड़े भाई बिहारी लाल को गुरुवार शाम को सेना के अधिकारियों ने दी। प्रकाश चंद के शहीद होने की खबर सुनते ही मां रूपी देवी, पत्नी ब्यासा देवी, इकलौती बहन धर्मा देवी, भाई बिहारी लाल का रो-रो का बुरा हाल है।
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शहीद का इकलौता बेटा सातवीं कक्षा का छात्र अंकित और बेटी पलक मां की गोद में बैठ कर पिता को याद कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में नए घर का निर्माण किया है, लेकिन नए घर में प्रवेश नहीं किया है। अंतिम बार प्रकाश चंद की बात पत्नी, मां, भाई और मामा लेख राज, इंद्र सिंह के साथ हुई।
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प्रकाश चंद ने सभी के साथ यही कहा कि उनकी यूनिट चंडीगढ़ आ रही है, जिसके बाद वह घर छुट्टी आएंगे जो हो नहीं सका। परिजनों के साथ गांव के लोग भी शहीद प्रकाश चंद के पार्थिक शव का घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। शहीद की इकलौती बहन का रो-रोकर बुरा हाल है।
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बेटे की शहादत सुनकर, ताया को अधरंग का दौरा - लडभड़ोल (मंडी)। मणिपुर में उग्रवादी हमले ने रिटायर्ड सूबेदार राकेश कुमार का इकलौता बेटा छीन लिया। 26 वर्षीय शहीद विकास भारद्वाज दो साल पहले ही डोगरा रेजीमेंट में भरती हुआ था। विकास के शहीद होने की खबर सुनकर ताया मुंशी राम को अधरंग का दौरा पड़ गया। जिन्हें उपचार के लिए बैजनाथ अस्पताल में दाखिल किया गया। छोटी बहन शिवानी भारद्वाज भी इकलौते भाई की मौत से सदमे में है। पिता राकेश कुमार की आखिरी बार तीन जून की सुबह विकास से फोन पर बात हुई थी। बेटे विकास ने कहा था कि वह ऑपरेशन सर्च में जा रहे हैं। बेटे की मौत से पिता राकेश कुमार के आंसू भी थम नहीं रहे। इनपुट: सृष्टिराज शर्मा
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आयुष को पापा का इंतजार- मणिपुर में गूंजी गोलियां की गड़गड़ाहट से हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला का सीना भी छलनी हुआ है। देश के लिए कुर्बान हुए बिलासपुर के बेटे राजेश कुमार (37) की मौत ने जिला के हीरापुर गांव सहित पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। राजेश कुमार की शहादत की खबर मिलते ही परिजनों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटा आयुष (12) पापा का इंतजार करता रहेगा। एक माह पूर्व छुट्टी काटकर जल्दी घर वापस आने का वादा करके गए राजेश कुमार अपना वादा तोड़ गया। राजेश की मौत की खबर सुनकर माता संतोष व पत्नी मीनाक्षी तो अपना सुध-बुध खो चुकी हैं। गश खाकर गिरने से बार-बार बेहोश हो रही हैं।
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पिता जोगेंद्र सिंह भी सीना चौड़ा करने की बात कर रहे हैं, लेकिन वह भी बेटे के गम में फफक-फफक रो रहे हैं। शुक्रवार को हीरापुर में शहीद राजेश कुमार के घर पर सांत्वना देने वालों का सारा दिन तांता लगा रहा। रिश्तेदारों, पड़ोसियों से लेकर विधायक रिखी राम कौंडल भी पहुंचे। उन्होंने भी परिजनों को ढांढस बंधाया, लेकिन कमबख्त आंसू रोकने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजेश के पिता जोगेंद्र सिंह ने स्वयं भी आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा की। उसके बाद अपने तीनों बेटों को भी देश सेवा के लिए भेज दिया। शहीद राजेश कुमार उनका सबसे बड़ा बेटा था। जोकि 6 डोगरा रेजिमेंट में मणिपुर में तैनात था। उनसे छोटा मुकेश कुमार असम में सीआरपीएफ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि सबसे छोटा बेटा दिनेश कुमार आर्मी की डोगरा-16 रेजिमेंट पठानकोट में तैनात हैं। शहीद का घर।
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देश के लिए कुर्बान हुआ बेटा: जोगेंद्र सिंह - देश के लिए कुर्बान हुआ है बेटा..., खुद सैनिक रहा हूं, बेटे की शहादत से सीना चौड़ा हुआ है। ये अलफाज हैं राजेश के पिता के। बेटे के जाने का गम भी कम नहीं है, लेकिन शहादत के दूसरे दिन तक प्रशासन की ओर से उनके बेटे की शहादत की कोई खबर न देने का उनको रंज है। सैनिक रहा हूं, अपने स्तर पर सब पता किया।
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दादा! क्यों रो रही है मम्मी, पापा को क्या हुआ-(इनपुट: कपिल ठाकुर हरिपुरधार/संगड़ाह/सिरमौर)। चार साल की ईशिता और दो साल की आशी को नहीं पता कि उनके पापा अशोक राणा देश पर कुर्बान हो गए हैं। घर में जुट रही रिश्तेदारों और लोगों की भीड़ देख दोनों हैरान परेशान हैं। अपनी मां को रोता-बिलखता देख ये दोनों भी रोना शुरू कर देती हैं। ईशिता और आशी के दादा बलदेव राणा बेटे के शहीद होने से भले ही खुद भीतर से टूट गए हों पर पोतियों और बहू को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं।
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ईशिता दादा से सवाल करती है कि उनके घर में ये भीड़ क्यों जुट रही है? मम्मी क्यों रो रही है? आप भी क्यों रो रहे हो? पापा को क्या हुआ? इन बच्चियों के सवालों का जवाब कोई भी नहीं दे पा रहा। इस माहौल को देख हर किसी की आंखें नम हो रही हैं। हरिपुरधार के टिक्करी डसाकना गांव के सैनिक अशोक राणा के घर मातम का माहौल है।
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अशोक के पिता बलदेव राणा (58) ने रुंधे गले से कहा कि बेटे ने तीन दिन पहले ही फोन पर जानकारी दी थी कि उसका स्थानांतरण मणिपुर से चंडी मंदिर हरियाणा हो चुका है। वह जल्द नई ज्वाइनिंग करेगा, लेकिन कुदरत को कुछ ओर ही मंजूर था। बेटा आखिरी बार अक्तूबर में छुट्टी आया था।
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नए घर में शिफ्ट होने से पहले देश पर कुर्बान हो गया सोहन- (इनपुट: आदेश शर्मा, राजपुर/सिरमौर)। मेरे दो बेटे पढ़ नहीं पाए जबकि मंझले बेटे सोहन ने पढ़ाई भी की, सेना में देश सेवा की और मातृभूमि की रक्षा के लिए शहादत भी दे दी। मुझे ऐसे बेटे पर गर्व है। यह कहना है मणिपुर में शहीद हुए सैनिक सोहन के पिता सुखदेव सिंह का। शुक्रवार सुबह 11:44 बजे शहीद सैनिक सोहन सिंह के घर से करीब 100 मीटर दूर रास्ते में ग्रामीणों की भीड़ लगी हुई थी। पूछने पर बताया गया कि शहीद सैनिक सोहन की माता रुकमणी कौर (48) एवं पत्नी रजनी (24) को इस बारे में नहीं बताया गया है।
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देर रात डेढ़ बजे माता रुकमणी देवी की अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जिसके बाद उनकी तबियत स्थिर है। 12:10 बजे घर के समीप सोहन के बड़े भाई हरमिंदर (35) एवं छोटा भाई मोहन (25) मिले और उन्होंने रोते बिलखते हुए अपने भाई सोहन की यादों को ‘अमर उजाला’ के साथ साझा किया। मात्र 27 वर्ष की उम्र में शहादत पाने वाले सोहन ने एक दिन पूर्व ही अपने पिता को फोन करके कहा था कि मकान पर लगे मजदूरों का हिसाब चुकता कर देना और 5 जून को नई मकान में शिफ्ट हो जाना, लेकिन नियति को कुछ ओर ही मंजूर था। नए मकान में शिफ्ट होने से पहले ही सोहन अपने परिवार को रोते बिलखते सदा के लिए छोड़ गया। शहीद सोहन का निर्माणाधीन घर।
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भाई हरमिंदर ने बताया कि सोहन सिंह ने कुछ दिन पूर्व ही बताया था कि उसका जल्द ही चंडी मंदिर हरियाणा ट्रांसफर होने वाला है। इस खबर के बाद उसकी पत्नी बेहद खुश थी। वह कह रही थी कि वह अपने पति के साथ चंडीगढ़ जाएगी, लेकिन पत्नी को खुशियां मिलने से पहले ही सोहन ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। शहीद सोहन का फाइल फोटो।