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'पवित्र स्थल पर की थी अभद्र टिप्पणी, इसलिए जेल गए आसाराम'

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'सितंबर 2010 में आसाराम बापू ने इस पवित्र स्थल पर अभद्र टिप्पणी की थी। आज इसी वजह से वे जेल में हैं।'
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आसाराम की इस टिप्‍पणी पर गद्दी समुदाय ने इसका विरोध किया था और उनके पुतले भी जलाए थे। समुदाय विशेष की धार्मिक आस्‍था को ठेस पहुंचाने के लिए चंबा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था।
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हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित पवित्र मणिमहेश की।

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स्वामी विरेंद्रानंद गिरि की मानें तो मणिमहेश पवित्र स्थल है और इस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती है।
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स्वामी विरेंद्रानंद गिरि ने कहा कि 2010 में बापू आसा राम ने मणिमहेश पर टिप्पणी की थी। जिसका परिणाम वो और उनका बेटा आज तक भुगत रहे हैं।
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आसाराम ने कहा था कि मणिमहेश्‍ा में कोई मणि नहीं है। लोग बेकार में यहां की यात्रा करते हैं।
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वहीं आज 5 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व से 15 दिवसीय पवित्र मणिमहेश यात्रा का आधिकारिक रूप से शुभारंभ हो गया। छोटा शाही स्नान सुबह 3.56 बजे शुरू हुआ जिसका मुहूर्त रविवार सुबह 3.02 बजे तक रहेगा।

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इस शुभ घड़ी में डल झील में स्नान करने को देश के कोने-कोने से हजारों शिव भक्त मणिमहेश पहुंच गए हैं।

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डुबकी लगाने और अलौकिक मणि के दर्शन करने के बाद ये वापस लौटेंगे। यात्री दो सप्ताह पहले ही मणिमहेश के लिए निकल पड़ते हैं। मणिमहेश यात्रा में जन्माष्टमी पर छोटा व 21 सितंबर को राधाष्टमी पर बड़ा शाही स्नान होगा।

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इस स्नान के दिन झील के मध्य में शिव चेले काली माता कुंड में मेढ़े की बलि देते थे। इस बार हाईकोर्ट की सख्ती के चलते पशु बलि पर रोक है। राधाष्मी पर आधिकारिक रूप से यात्रा का समापन होता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आज से भरमौर से हेलीकॉप्टर उड़ानें भी शुरू हो गई हैं।

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हर वर्ष हजारों की संख्या में शिव भक्त मणिमहेश झील में स्नान करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि मणिमहेश में जैसी आस्था होती है, वैसे ही दर्शन होते हैं। दर्शन शाम को आठ बजे भी हो सकते हैं और सुबह चार बजे भी। एक दिव्य ज्योति आसमान से चमकती हुई नजर आती है और कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने के बाद लुप्त हो जाती है। जब झील के जल में ये किरणें पड़ती हैं तो झील का पानी अमृत समान हो जाता है। मान्यता है कि डल झील में स्नान करने से पापों से छुटकारा मिल जाता है और रोगों से मुक्ति मिलती है।

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मणिमहेश रोड मैप- पंजाब समेत अन्य राज्यों से आने वाले यात्री पठानकोट से चंबा और भरमौर पहुंच सकते हैं। पठानकोट से चंबा की दूरी 120 किलोमीटर है जबकि चंबा से भरमौर 70 किलोमीटर। यहां से हड़सर करीब 12 किलोमीटर दूर है। हड़सर से 13 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई के बाद मणिमहेश पहुंचा जा सकता है। जम्मू-कश्मीर से आने वाले वाया लंगेरा या खैरी से चंबा पहुंच सकते हैं। हिमाचली यात्री मंडी-पठानकोट हाईवे पर द्रमण-सिहुंता-चंबा मार्ग से भरमौर पहुंच सकते हैं। नूरपुर-लाहडू-जोत-चंबा या नूरपुर-लाहडू-बनीखेत-चंबा से भी मणिमहेश पहुंचा जा सकता है।
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मणिमहेश जाने वाले यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है। दो कंपनियों डेक्कन और यूटीएयर को प्रशासन ने हवाई यात्रा का जिम्मा सौंपा है। हवाई सफर का एक तरफ का किराया 2,847 रुपये तय किया गया है।
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