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यहां स्नान नहीं किया तो अधूरी रहती है चार धाम की यात्रा

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हिमाचल के बिलासपुर जिले में महर्षि मार्कंडेय की तपोस्थली मार्कंड में स्नान किए बिना चार धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है। किंवदंतियों के अनुसार यहां शिव भगवान प्रकट हुए थे और यहां झरना फूट पड़ा। पढ़िए पूरी कहानी। इनपुट: संजय भारद्वाज, राजकुमार सेन, गोपाल शर्मा
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यहां स्नान नहीं किया तो अधूरी रहती है चार धाम की यात्रा

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इसी झरने में स्नान किया जाता है। स्नान के बाद ही चार धाम की यात्रा को पूर्ण माना जाता है। बैसाखी के पर्व पर यहां काफी संख्या में लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं। मंगलवार को भी श्रद्धालुओं का खूब तांता लगा। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का सिलसिला आरंभ हो जाता है।
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पौराणिक कथा के अनुसार मृकंडु ऋषि की घोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें पुत्र रतन का वरदान दिया। वरदान के साथ उन्होंने पुत्र के अल्पायु होने का भी जिक्र किया। इससे पिता मृकंडु चिंताग्रस्त रहने लगे। बालक मार्कंडेय कुशाग्र बुद्धि होने के साथ-साथ पितृभक्त भी थे।

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उन्होंने अपने पिता के मन को कुरेद कर चिंता का कारण जान लिया। चिंता से मुक्ति के लिए भगवान शिव की तपस्या की। जब उनकी आयु 12 वर्ष होने में केवल तीन दिन शेष रह गए, तो उन्होंने रेत का शिवलिंग बनाया और शिव की तपस्या में लीन हो गए। यमदूत उनके प्राण हरण करने के लिए आए, लेकिन जब वह बाल तपस्वी की ओर बढ़ने लगे तो रेत के शिवलिंग में से आग की लपटें निकलीं।
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हारकर यमदूत चले गए तथा यमराज को सारा हाल सुनाया। स्वयं यमराज जब वहां आए तो मार्कंडेय जी ने शिवलिंग को बांहों में पकड़ लिया। शिवलिंग में से शिव प्रकट हुए तथा उन्होंने यमराज को वापस यमपुरी जाने का आदेश दिया। ऐसा मानना है कि यह घटना बैसाखी की पूर्व संध्या को घटित हुई।
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उस स्थान पर पानी का झरना फूट पड़ा, जिसे आज मार्कंडेय तीर्थ के नाम से जाना जाता है। बैसाखी को यहां बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आकर बह्म मुहूर्त से दिन भर पवित्र स्नान करते हैं।
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साहित्यकार कुलदीप चंदेल कहते हैं कि मार्कंडेय तीर्थ चार धाम से बढ़कर है। आज भी चार धाम यात्रा करने के बाद लोग मार्कंडेय में पवित्र स्नान को पहुंचते हैं। खासकर बिलासपुर के लोग सालभर मंदिर में स्नान करने को पहुंचते हैं।
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घुमारवीं के मस्त राम ने बताया कि वह दो महीने पहले ही चार धाम यात्रा कर लौटे हैं। हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थल की भी उन्होंने यात्रा की। लिहाजा, इस यात्रा को सफल बनाने के लिए आज उन्होंने मार्कंडेय तीर्थ में परिजनों सहित पवित्र स्नान किया।
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