हिमाचल में जंगलों की आग ने विकराल रूप ले लिया है। बढ़ते तापमान के साथ-साथ जंगल भी दहक रहे हैं। ये गर्मी को बढ़ाने में आग में घी डालने का काम कर रही है।
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जंगल की आग से जहां बहुमूल्य वन संपदा राख हो रही है, वहीं वन्य जीवन भी व्यापक स्तर पर प्रभावित हो रहा है। आग से बचने के लिए एक मादा तेंदुआ और उसके शावक रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच गए।
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ऊना में रामगढ़ धार के तहत ध्यूंसर मंदिर तलमेहड़ा के साथ लगते सकारू जंगल में आग लगी हुई है। अग्निकांड में लाखों की जंगली संपदा जलकर राख हो गई है।
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वहीं, जिला कुल्लू में बंजार उपमंडल में चीड़ के जंगलों में आग लगी हुई है। चैहणी बीट के देहुरी व होरनगार्ड के चीड़ के जंगल में अभी आग लगी हुई है। जबकि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में आने वाले कलवारी बीट में स्थानीय लोगों की मद्द से आग बुझाई गई है।
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जिला हमीरपुर में फायर सीजन के दौरान 26 जंगल आग की भेंट चढ़ गए हैं। इससे कुल 140.7 हेक्टेयर जंगलात भूमि प्रभावित हुई है। इन अग्रिकांडों से विभाग को अनुमानित सवा दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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जिला मंडी में भीषण गर्मी में जंगल दहकना शुरू हो गए हैं। बंदेहड के घट्टा वन क्षेत्र में आग लगने से वन संपदा राख हो गई। लगभग 2 से 3 हेक्टेयर क्षेत्र में चीड़ की पत्तियां जल गई हैं।
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चंबा में दिन प्रतिदिन जंगलों में आग फैल रही है। जंगल की आग में अभी तक लाखों रूपये की वन संपदा राख हो चुकी है। इसके अलावा जमीन पर रेंगने वाले जीव जंतु भी आग की भेंट चढ़ गए। पेड़ों व झाड़ियों में बने पक्षियों के घौंसले जंगल की आग की वजह से बर्बाद हो गए।