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दुनियाभर के लिए मिसाल बना ये शख्स, कई पीढ़ियां रखेंगी याद

Sun, 23 Oct 2016 02:45 PM IST
अशोक राणा/अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
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- फोटो : अमर उजाला
66 वर्षीय इस शख्स की कहानी जानकर आप भी सलाम करेंगे। लामा छुटलिन छोंजोर ने ऐसा कारनामा किया है कि आने वाली कई पीढ़ियां याद रखेंगी। जिस काम को करने में सरकार ने भी हाथ पीछे खींच लिए उसे इस शख्स ने अकेले अपने दम पर कर दिखाया। आइए जानते हैं-
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समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर पिछले पांच सालों से पहाड़ों को भेदकर सड़क बनाने में जुटे बौद्ध भिक्षु 66 वर्षीय लामा छुटलिन छोंजोर की मेहनत आखिर रंग लाई है। उन्होंने अपने जीवन भर की पूंजी और चंदे से 26 किलोमीटर लंबी सड़क बना दी है। छुटलिन ने अकेले पहाड़ काटकर गांव तक सड़क पहुंचा दी।
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दारचा से शिंकुला दर्रा होकर गुजरने वाली इस सड़क को जम्मू कश्मीर के कारगिल जिला के उपमंडल जंसकर के पहले गांव करग्या तक बनाया गया है। शुक्रवार को पहली बार लामा छोंजोर जीप लेकर करग्या गांव पहुंचे। यहां पहुंचने से लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

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जम्मू कश्मीर की ओर से हिमांक प्रोजेक्ट निर्माण कार्य को अंजाम दे रहा है। हालांकि अभी 25 किलोमीटर सड़क और बनना बाकी है। इस मार्ग से मनाली-कारगिल की दूरी भी करीब 300 किलोमीटर कम हो जाएगी। पांच साल पहले लामा छुटलिन छोंजोर ने शिंकुला दर्रा से करग्या गांव की ओर सड़क निर्माण का काम शुरू किया था। एक साल पहले ही इस काम के लिए नेशनल एसटी कमीशन लामा छोंजोर को सम्मानित भी कर चुका है।
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हालांकि, दारचा-शिंकुला-पदुम सड़क के निर्माण का जिम्मा सीमा सड़क संगठन के दीपक विंग के पास है।  बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण लामा छोंजोर ने खुद ही सड़क निर्माण का जिम्मा उठाया।
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लामा ने बताया कि जंसकर के लोग वर्षों से पैदल शिंकुला दर्रा पार अपनी रोजमर्रा की चीजों के लिए हिमाचल का रुख करते आ रहे हैं। लेकिन अब पहली बार गांव तक सड़क बन जाने से बॉर्डर के लोगों को राहत मिलेगी। लामा ने कहा कि एक बौद्ध भिक्षु को सच में अब निर्वाण प्राप्त हो गया है। भगवान बुद्ध ने कहा है कि दूसरों की भलाई में ही अपना कल्याण निहित है। अपनों के लिए कुछ करने के बाद मुझे बेहद संतुष्टि का अहसास हो रहा है।
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हाल ही में दीपक प्रोजेक्ट के 70 आरसीसी से स्थानांतरित कमांडर कर्नल केपी राजेंद्र का कहना है कि लामा छोंजोर कई सालों से इस सड़क निर्माण में जुटे थे। वहीं नेशनल एसटी कमीशन के उपाध्यक्ष एवं विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि जुनून और हिम्मत के दम पर लामा छोंजोर सच में हिमालय का लक्ष्मण मांझी साबित हुए हैं। लामा ने ग्रामीणों के सहयोग और खुद के पैसे से सड़क काटने वाली मशीनरी खरीदी। ग्रामीणों ने सड़क के लिए श्रमदान भी किया।
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