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कुल्लू हादसा: एक साथ जलीं मां-बेटियों की तीन चिताएं, नहीं थम रहे आंसू

Fri, 21 Jun 2019 06:35 PM IST
अरविन्द ठाकुर हरि रामचंद्र चौधरी, अमर उजाला, सैंज/बंजार (कुल्लू)
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- फोटो : अमर उजाला
कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर हुए बस हादसे ने कई घरों के चिराग एक साथ बुझा दिए। हादसे के बाद बंजार क्षेत्र में कई पंचायतों में चूल्हे नहीं जले। हजारों लोग अपने-अपने रिश्तेदारों के घरों में दिन भर विलाप करते रहे। बंजार की चार पंचायतों के ही 30 लोगों की जान जा चुकी है। सभी मृतक आपस में रिश्तेदार हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में लोग समझ ही नहीं पा रहे है कि किस रिश्तेदार के घर पहले जाएं और किसके घर बाद में। घाटी की अकेली बाहू पंचायत में 12 लोगों इस अभागी बस में मारे गए। तांदी पंचायत में 7, टील पंचायत में 5 और मोहनी पंचायत में 6 लोगों की जान चली गई। पत्रकार मोहन लाल ठाकुर और उनकी मासूम बेटी जाहनवी की सूम गांव में एक साथ चिता जलती देख किसी के आंसू नहीं रूक रहे थे। उधर, बछूट गांव में मां-बेटियों की तीन चिताएं एक साथ जलीं।
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- फोटो : अमर उजाला
इस भयंकर मंजर को देख कर हर कोई रो रहा है। लोगों की मौत के बाद कई गांवों में मातम पसरा हुआ है। दोपहर को पूरी बंजार घाटी चिताओं के धुएं से भर गई। शांत वादियों में अपने-अपने रिश्तेदार के हमेशा के लिए छोड़ जाने के दुख में आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि जैसे ही हादसे की सूचना मिली इलाके में हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पूरे इलाके के लिए यह बेहद दुखद घटना है। लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं। एक साथ कई अर्थियां देख हर कोई सहम उठा। किसी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

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- फोटो : अमर उजाला
हादसे में घायल आनी निवासी विजय कुमार ने बताया कि बस में सवारियां ठूंस-ठूंस कर भरी हुई थी। हादसे वाले स्थान पर पहले एकाएक आगे की तरफ झटका लगा फिर बस पीछे की ओर खिसकने लगी। जब तक वे कुछ समझ पाते तब तक बस सड़क से बाहर निकल चुकी थी। चीख-पुकार के बीच दस सेकेंड के भीतर ही सब कुछ खत्म हो गया।
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- फोटो : अमर उजाला
बस में सवार यात्रियों के परिजन ठाकुर चंद, देस राज, ध्यान सिंह, प्रीतम सिंह और यज्ञ चंद ने कहा कि इस बस में मजबूरी में सफर करना पड़ता था। स्कूल-कॉलेज में छुट्टी होने के बाद गाड़ागुशैणी की तरफ यही बस जाती थी। वक्त पर घर पहुंचने के लिए इसी बस में सफर करना पड़ता था। सरकार से कई बार इस रूट पर सरकारी बस चलाने की मांग रखी गई लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
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