बस में सवार यात्रियों के परिजन ठाकुर चंद, देस राज, ध्यान सिंह, प्रीतम सिंह और यज्ञ चंद ने कहा कि इस बस में मजबूरी में सफर करना पड़ता था। स्कूल-कॉलेज में छुट्टी होने के बाद गाड़ागुशैणी की तरफ यही बस जाती थी। वक्त पर घर पहुंचने के लिए इसी बस में सफर करना पड़ता था। सरकार से कई बार इस रूट पर सरकारी बस चलाने की मांग रखी गई लेकिन किसी ने नहीं सुनी।