इन 42 दिनों तक इन गांवों में न तो कोई जोर से बोल सकता है और न ही घरों में संगीत और न ही टीवी चलाए जाते हैं। कहा जाता है इससे भगवान की तपस्या में विघ्न पड़ता है। अगर ऐसा हुआ तो...
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यहां तपस्या कर रहे हैं 'भगवान' जोर से बोलना मना है!
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यह स्थान देवभूमि हिमाचल के मशहूर पर्यटन स्थल मनाली के निकटवर्ती गोशाल गांव के आसपास के 9 गांवों के लोगों को 42 दिन तक ऊंची आवाज में बोलने की अनुमति नहीं होती। आईए जानते हैं पूरी कहानी..
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ऐसे में उनकी तपस्या में विघ्न न पड़े इसको देखते हुए इस तरह के आदेश जारी किए जाते हैं। मान्यता है कि अगर कोई ऐसा करता है तो उसे परमात्मा के क्रोध का सामना करना पड़ता है। आईए जानते हैं पूरी कहानी..
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हर वर्ष गौतम ऋषि 42 दिनों के लिए स्वर्ग प्रवास पर जाते हैं। लोगों में विश्वास है कि इस दौरान वह गहन तपस्या में लीन रहेंगे। ऐसे में उनकी शांति भंग न हो इसलिए इन 9 गांवों में इस दौरान न ही घरों में टीवी, रेडियो चलाया जाता है और न ही खेतों में खेतों में कुदाली चलाई जाती है। लोग ऐसा कोई काम नहीं करते जिससे गौतम ऋषि की तपस्या में विघ्न पड़े।
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इस नियम को कुल्लू के गोशाला गांव के सहित 9 गांवों के लोग सदियों से निभाते आ रहे हैं। इसमें रूआड़, कोठी, सोलंग, पलचान, गौशाल, बुरूआ, शनाग, मझाच और कुलंग शामिल हैं।
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गौशाल गांव और इसके आसपास के क्षेत्र को ऋषि गौतम, वेद व्यास और कंचननाग की सामूहिक घाटी के रूप में जाना जाता है। गौतम ऋषि के धार्मिक अनुष्ठान की पूर्ति के लिए इन गांवों के लोग इन नियमों का निर्वाहन करते हैं।
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इस दौरान देवता के कारकूनों के अलावा किसी को मंदिर के पास आने की अनुमति नहीं होती। गौतम ऋषि के गौशाल गांव में मंदिर के कपाट भी एक खास विधि अपनाकर बंद किए जाते हैं। इससे क्षेत्र के आने वाले समय को लेकर भविष्यवाणी की जाती है।
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गौतम ऋषि मंदिर के कपाट भी देव विधि से छानी हुई मिट्टी बिछाकर बंद किया जाता है। इससे क्षेत्र के आने वाले समय को लेकर भविष्यवाणी की जाती है।
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मिट्टी पर मिलने वाले निशानों के माने जाते हैं ये परिणाम देवता के मंदिर में रखी गई मिट्टी पर कपाट खुलने पर अगर सिंदूर निकला तो क्षेत्र में पूजा-पाठ और विवाह ज्यादा होंगे, अनाज के छिलके निकलने का अर्थ फसल अधिक होना माना जाता है। अनाज का दाना निकलने से फसलों को नुकसान वह अपेक्षा से कम फसल होना। अगर लकड़ी और रेत के कण निकले तो बाढ़ का खतरा और कोयला निकलने पर आगजनी की घटनाएं होने की संभावना रहती है। मिट्टी में अगर जानवरों के बाल निकले तो पशु धन का नुकसान होता है।
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देवताओं की भूमि मानी जाती है हिमाचल और खासकर कुल्लू जिला के लोगों की देवताओं पर अपार श्रद्धा रहती है। हर वर्ष यहां होने वाला दशहरा देश विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए आकर्षकण का केंद्र रहता है। यहां सैंकड़ों देवता मेले में शिरकत करते हैं।