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खास चीज, जिसके लिए 25 किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे खली

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द ग्रेट खली बनकर बड़े बड़े सूरमाओं को धूल चटाने वाले दलीप राणा उर्फ खली से जुड़ी कई बातें आज भी ऐसी हैं जिन्हें सिर्फ कुछ लोग ही जानते हैं। उनकी एक चीज ऐसी है जो खली को बेहद परेशान करती थी और उन्हें उसके लिए 25 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। रिपोर्टः जगत सिंह तोमर
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खास चीज, जिसके लिए 25 किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे खली

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ये चीज आजकल आपको चंद मिनटों में ही बाजार जाकर मिल जाएगी मगर खली को इसके लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। उन्हें ये चीज एक शख्स से मिलती थी जो उनके घर से 25 किलोमीटर दूर रहता है।
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खास चीज, जिसके लिए 25 किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे खली

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94 साल के इस शख्स का नाम सुंदरलाल है और यह खली के घिराइना गांव से दूर शिलाई गांव में रहता है। खली की जो यादें इनसे जुड़ी है वो किसी और से नहीं। तभी तो सुंदरलाल आज भी खली को बेहद याद करते हैं।

खास चीज, जिसके लिए 25 किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे खली

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दरअसल बचपन में ही खली का शरीर से महाबली बन गए थे। पूरे इलाके में गिनी चुनी दुकानें होती थी। ऐसे में खली को जूते खरीदने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। आसपास की किसी दुकान में उनके नाप के जूते नहीं थे।
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इसके अलावा खली के पास बाहर शहर जाकर जूते लाने या बनवाने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। ऐसे में वह 25 किलोमीटर दूर सुंदरलाल के पास आकर अपने जूते ‌बनवाते थे।
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सुंदरलाल कहते हैं कि खली को एक फुट चौड़ाई और 14 इंच लंबाई वाला जूता लगता था। इस नाप का जूता पूरे एरिया में किसी और को नहीं लगता था।
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खली अपने घर से 25 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर सुंदरलाल के पास आकर अपना जूता ले जाते थे।

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सुंदरलाल बताते हैं कि कभी तो खली के पास पैसे भी नहीं होते थे। तो वे कम पैसे में ही ये जूते खली को दे देते थे।

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सुंदरलाल ने बताया कि अब खली शायद उन्हें भूल गए हैं। बुजुर्ग सुंदरलाल का कहना है कि उनकी आखिरी इच्छा यही है कि खली एक बार उनसे मिले।
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खली भले ही अब नामी कंपनियों से अपने नाप के जूते बनवाते हों, लेकिन उन्हें भी ये याद है कि सुंदरलाल ने बचपन में उनकी खूब मदद की थी।

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