फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कारगिल हीरो विक्रम बत्रा को शेरशाह के नाम से जानते थे दुश्मन, जानिए उनकी अनसुनी कहानी

Tue, 07 Jul 2020 06:42 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/कांगड़ा(पालमपुर)
विज्ञापन
1 of 6
परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
हिमाचल के कांगड़ा जिले के पालमपुर के परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा 7 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में देश के लिए शहीद हो गए थे। विक्रम की शहादत के बाद प्वाइंट 4875 चोटी को बत्रा टॉप का नाम दिया गया है। हालांकि, कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इस युद्ध के हीरो के अदम्य साहस और वीरता की कहानियां आज भी हमारी रगों में जोश भर देती हैं। 9 सितंबर 1974 को हिमाचल के कांगड़ा जिले के पालमपुर में घुग्गर गांव में जन्मे शहीद विक्रम बत्रा को उनकी बहादुरी के कारण दुश्मन भी उन्हें शेरशाह के नाम से जानते थे।


 
विज्ञापन

2 of 6
परमवीर विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
 शहीद विक्रम बत्रा ने 1996 में इंडियन मिलिटरी अकादमी में दाखिला लिया था। 6 दिसंबर 1997 को कैप्टन बत्रा जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल हुए। कारगिल युद्ध में उन्होंने जम्मू-कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन का नेतृत्व किया।

 
विज्ञापन

3 of 6
परमवीर विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
20 जून 1999 को कैप्टन बत्रा ने कारगिल की प्वाइंट 5140 चोटी से दुश्मनों को खदेड़ने के लिए अभियान छेड़ा और कई घंटों की गोलीबारी के बाद मिशन में कामयाब हो गए। इसके बाद उन्होंने जीत का कोड बोला- ये दिल मांगे मोर।  कारगिल युद्घ के दौरान जब उन्हें 5140 चोटी को कब्जे में लेने का ऑर्डर मिला तो बतरा अपने पांच साथियों को लेकर मिशन पर निकल पड़े। 


 

4 of 6
परमवीर विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तानी सैनिक चोटी के टॉप पर थे और मशीन गन से ऊपर चढ़ रहे भारतीय सैनिकों पर गोलियां बरसा रहे थे। लेकिन बतरा ने हार नहीं मानी और एक के बाद एक पाकिस्तानी को ढेर करते हुए इस चोटी पर कब्जा कर लिया। बतरा खुद गंभीर रूप से घायल भी हुए लेकिन आखिरकार लंबी गोलीबारी के बाद इस पर अपना कब्जा कर लिया। 4875 प्वांइट पर कब्जे के दौरान भी बत्रा ने बेहद बहादुरी दिखाई और इस परमवीर ने सैनिक को यह कहकर पीछे कर दिया कि 'तू बाल-बच्चेदार है, पीछे हट जा'।


 
विज्ञापन

5 of 6
- फोटो : अमर उजाला
खुद आगे आकर बत्रा ने दुश्मनों की गोलियां खाईं। उनके आखिरी शब्द थे 'जय माता दी'। वहीं, कैप्टन विक्रम बतरा के परिजनों को अभी इस बात का मलाल है कि उनके बेटे की शहादत को किसी पाठ्यक्रम में नहीं जोड़ा गया। उनके पिता जीएल बतरा ने कहा कि इसके लिए उन्होंने सरकारों से पत्राचार भी किया है। लेकिन अभी तक इस मामले में किसी ने कोई कदम नहीं उठाया है। उनके पिता की मानें तो उनके बेटे की शहादत को किसी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। विक्रम बतरा के घर पर उनके पिता जीएल बतरा, माता कमलकांत बतरा, शहीद मेजर सुधीर वालिया की बहन आशा, जीजा प्रवीन आहलुवालिया, भाभी सिमरन वालिया, ऋषिका और प्रवेश मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कारगिल युद्ध में देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में अपने अदम्य साहस व शौर्य से शत्रुओं को पराजित करने वाले परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा भारतीय सेना के उन अद्वितीय नायकों में से हैं जिनकी पराक्रम गाथा अमिट रहेगी।‬
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें