खुद आगे आकर बत्रा ने दुश्मनों की गोलियां खाईं। उनके आखिरी शब्द थे 'जय माता दी'। वहीं, कैप्टन विक्रम बतरा के परिजनों को अभी इस बात का मलाल है कि उनके बेटे की शहादत को किसी पाठ्यक्रम में नहीं जोड़ा गया। उनके पिता जीएल बतरा ने कहा कि इसके लिए उन्होंने सरकारों से पत्राचार भी किया है। लेकिन अभी तक इस मामले में किसी ने कोई कदम नहीं उठाया है। उनके पिता की मानें तो उनके बेटे की शहादत को किसी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। विक्रम बतरा के घर पर उनके पिता जीएल बतरा, माता कमलकांत बतरा, शहीद मेजर सुधीर वालिया की बहन आशा, जीजा प्रवीन आहलुवालिया, भाभी सिमरन वालिया, ऋषिका और प्रवेश मौजूद रहे।